सरकारी बंगला नहीं मिला तो एकनाथ शिंदे से नाराज हुए सचिन अहीर, ठाकरे गुट को छोड़ शिवसेना में हुए थे शामिल
Sachin Ahir Unhappy Eknath Shinde: उद्धव ठाकरे गुट छोड़ शिवसेना में शामिल हुए सचिन अहीर सरकारी बंगला न मिलने के कारण उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से नाराज बताए जा रहे हैं।
- Written By: अनिल सिंह
एकनाथ शिंदे से नाराज सचिन अहीर (फोटो क्रेडिट-X)
Sachin Ahir Government Bungalow Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में दो सप्ताह पहले उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों की बगावत के बाद बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। इस सियासी भूचाल के बीच ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले नेता सचिन अहीर ने भी पाला बदलते हुए उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया था।
सचिन अहीर का पार्टी छोड़ना उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के लिए एक बड़े व्यक्तिगत झटके के रूप में देखा गया, क्योंकि वे वर्ली निर्वाचन क्षेत्र में आदित्य ठाकरे के साथ साए की तरह काम करते थे। हालांकि, धूमधाम से शिंदे गुट में शामिल होने और महाराष्ट्र विधान परिषद के उपाध्यक्ष के तौर पर संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब सचिन अहीर के असंतुष्ट होने की खबरें राजनीतिक गलियारों में तैरने लगी हैं। खबर है कि वो सरकारी बंगला ना मिलने की वजह से शिंदे से खफा हैं।
संवैधानिक पद मिलने के बाद भी नहीं मिला सरकारी बंगला
एक न्यूज वेबसाइट ने सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार अपनी खबर में लिखा कि सचिन अहीर शिवसेना से संगठनात्मक रूप से नाराज नहीं हैं, बल्कि वे प्रशासन के एक फैसले से बेहद परेशान हैं। शिंदे गुट में शामिल होने के बाद उन्हें एमएलसी के उपसभापति (उपाध्यक्ष) पद की जिम्मेदारी तो सौंप दी गई, लेकिन इस बड़े संवैधानिक पद पर आसीन होने के बावजूद उन्हें अब तक रहने के लिए आधिकारिक सरकारी बंगला आवंटित नहीं किया गया है।
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अहीर ने निजी तौर पर इस प्रशासनिक कोताही पर गहरा खेद व्यक्त किया है। अंदरखाने से आ रही खबरों की मानें तो सचिन अहीर ने इस पूरे विषय को लेकर खुद शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के सामने अपनी सीधी नाराजगी और स्पष्ट असंतोष दर्ज कराया है। इस पर कार्रवाई करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अहीर को शांत कराया है और आश्वासन दिया है कि तकनीकी अड़चनों को दूर कर उन्हें बहुत जल्द ही एक सरकारी बंगला आवंटित कर दिया जाएगा।
उपाध्यक्ष बनने के बाद शरद पवार से की मुलाकात
गौरतलब है कि सचिन अहीर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत मूल रूप से शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से की थी। उनके राजनीतिक सफर को आकार देने और करियर को आगे बढ़ाने में शरद पवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। इसी पृष्ठभूमि के कारण, शिवसेना में शामिल होने और उपसभापति का पदभार ग्रहण करने के बाद सचिन अहीर ने अचानक एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की और उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गईं।
अहीर साल 2019 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनसीपी छोड़कर तत्कालीन अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए थे, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें विधान परिषद (एमएलसी) भेजा था। पूर्व में वर्ली विधानसभा क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व कर चुके सचिन अहीर के इस नए रुख ने महायुति और महाविकास अघाड़ी दोनों खेमों में हलचल बढ़ा दी है।
