मुंबई: मुंबई की ‘लाइफलाइन’ (Lifeline) कही जाने वाली लोकल ट्रेन (Local Train) के सफर को आसान बनाने का प्रयास भले ही होता रहा हो, परंतु एक चीज नहीं बदल पाई और वह है, लोकल में भारी भीड़। पिछले 9 दशक में जैसे-जैसे लोकल ट्रेनों के डिब्बे बढ़ते गए, वैसे ही मुंबईकरों की भीड़ भी विकराल होती गई। लोकल ट्रेनों में लटक कर यात्रा करना मुंबईकरों की जैसे नियति बन गई हैं।
चार कोच से शुरू हुआ मुंबई लोकल का सफर 15 डिब्बों तक पहुंच गया है, परंतु यात्रियों की भीड़ कम नहीं हो रही है। देश की सबसे सस्ती परिवहन सेवा के रूप में मुंबई लोकल का कोई विकल्प फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा हैं। वैसे राज्य सरकार मुंबई और आसपास शहरों में सुरक्षित परिवहन के लिए लगभग 330 किमी मेट्रो का जाल बिछाने में लगी है। मेट्रो के संचालन में अभी काफी वक्त लगने वाला है। मध्य और पश्चिम रेलवे पर चलने वाली लोकल यात्रियों के लिए कम पड़ने लगी हैं।
यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मध्य रेलवे पर 15 डिब्बा लोकल बढ़ाने की मांग हो रही है, परन्तु मध्य रेलवे के पास 15 डिब्बे के मात्र दो रेक ही उपलब्ध हैं। 15 डिब्बे की केवल 20 से 22 सर्विस मेन फ़ास्ट लाइन सीएसएमटी से कल्याण तक चलाई जाती है,जबकि बाकी सभी 12 डिब्बे की लोकल चल रही है। मध्य रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल 15 डिब्बे की लोकल चलाना असंभव है। स्लो लाइन पर ज्यादातर प्लेटफ़ॉर्म लंबाई में छोटे हैं। कुछ की लंबाई बढ़ाने का काम चल रहा है। इसके साथ कई तकनीकी समस्या भी है। सीएसएमटी से कुर्ला तक अभी भी मात्र 4 ट्रैक होने से लोकल की फेरियां बढ़ाना भी मुश्किल है। उल्लेखनीय है कि मध्य रेल की लोकल से रोजाना लगभग 40 लाख लोग यात्रा करते हैं। तीनो उपनगरीय कॉरिडोर पर कुल 1,810 सर्विस चलती हैं।
मध्य रेलवे को पीछे छोड़ते हुए पश्चिम रेलवे पर 15 डिब्बे की लोकल सर्विस 132 तक पहुंच गई है। इस रूट पर अंधेरी से विरार तक प्लेटफार्म की लंबाई का काम पूरा होने से 15 डिब्बे की लोकल ट्रेन को चलाना संभव है। पश्चिम रेलवे पर कुल 1,383 लोकल सर्विस चलती है। इनमें 15 डिब्बे की लोकल ट्रेन की 132 और एसी लोकल की 79 सर्विस है। पश्चिम रेलवे के रूट पर भी 15 डिब्बा लोकल के साथ और ज्यादा एसी लोकल चलाने की मांग हो रही हैं।
रेल यात्री सेवा सुविधा संगठन के अध्यक्ष पारस नाथ तिवारी ने कहा कि 15 डिब्बे की लोकल बढ़ने से अपने आप 25 प्रतिशत तक भीड़ कम हो जाएगी। मुंबई लोकल से रोजाना 75 लाख से ज्यादा लोग यात्रा करते हैं। लाइफलाइन को मजबूत करने पर पहले ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए आसान उपाय 15 डिब्बे की लोकल बढ़ाना होगा। इससे ही आम लोगों को राहत मिल सकती हैं।
वैसे आने वाले वर्षों में मुंबई में एसी लोकल चलाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। एमआरवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मुंबई लोकल का सफर आसान बनाने के लिए 2023 तक ज्यादा एसी ट्रेन लाई जाएगी। मुंबई शहरी परिवहन परियोजना (एमयूटीपी) 3 ए के तहत 238 एसी लोकल ट्रेन बनाने की योजना है। इस तरह एसी लोकल की सर्विस बढ़ने के साथ नॉन एसी लोकल की सेवाएं और कम हो जाएंगी।