RSS नेता अर्जुन चांडेकर व अन्य (सोर्स: सोशल मीडिया)
RSS Leader Arjun Chandekar Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कोंकण प्रांत संघचालक अर्जुन चांडेकर ने ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं लाया गया है। चांडेकर ने तर्क दिया कि कुछ विपक्षी दलों द्वारा इस बिल को मिला समर्थन इस बात का प्रमाण है कि यह कानून सर्व-समावेशी और न्यायसंगत है।
हाल ही में हरियाणा के पानीपत में आयोजित ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा‘ की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए अर्जुन चांडेकर ने कहा कि यह कानून किसी पर थोपा नहीं जा रहा है। इसका उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है और इससे हर धार्मिक समूह को लाभ होगा।” उन्होंने इसे सामाजिक सद्भाव की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
अपने संबोधन के दौरान चांडेकर ने संघ के शताब्दी वर्ष (2025-2026) के उपलक्ष्य में हो रहे कार्यों का ब्यौरा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कोंकण क्षेत्र में पिछले एक साल में संघ की शाखाओं में 8% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रांत कार्यवाह विट्ठलराव कांबले ने आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में कोंकण प्रांत (दहानू से गोवा तक) में 694 शाखाएं सक्रिय हैं। केवल मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में ही 258 शाखाएं, 155 साप्ताहिक बैठकें और 24 मासिक गोष्ठियां संचालित की जा रही हैं।
शताब्दी वर्ष के तहत संघ ने जन-जन तक पहुंचने के लिए व्यापक अभियान चलाया है। जनवरी और फरवरी के महीनों में करीब 3,740 स्वयंसेवकों ने कोंकण के 3.17 लाख से अधिक घरों में दस्तक दी। इसके अलावा, विजयादशमी के उत्सव पर 386 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें 43,500 से अधिक पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
यह भी पढ़ें:- एकनाथ शिंदे ने PM मोदी से दिल्ली में की मुलाकात, 1 घंटे तक चली मीटिंग, जानें क्या हुई बात
आगामी योजनाओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि संघ 3,100 से अधिक हिंदू सम्मेलन, 147 सद्भाव बैठकें और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ 27 सार्वजनिक संवाद कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। इनका मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाना है।
अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) द्वारा संघ पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिशों पर चांडेकर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “हम पिछले 100 वर्षों से राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में लगे हैं। जो लोग हमें करीब से जानते हैं, वे हमारे काम को समझते हैं। विदेशी संस्थाओं को शायद हमारे जमीनी कार्यों की जानकारी नहीं है, लेकिन उनकी टिप्पणियों से हमारा काम नहीं रुकेगा।”