कांग्रेस में हो सकता है शिवसेना UBT का विलय! बागी सांसदों के प्रस्ताव में चौंकाने वाला खुलासा
Rebel MPs Proposal Shiv Sena UBT Congress Merger: उद्धव गुट के बागी सांसदों के प्रस्ताव में बड़ा खुलासा- कांग्रेस में विलय की आशंका के कारण छोड़ी पार्टी। राउत का बयान बना बगावत की वजह।
- Written By: अनिल सिंह
Shiv Sena UBT Congress Merger Claim: महाराष्ट्र के सियासी महा-संग्राम और ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच एक ऐसा सनसनीखेज और अभूतपूर्व खुलासा हुआ है, जिसने उद्धव ठाकरे खेमे की राजनीतिक जमीन हिलाकर रख दी है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 बागी सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष प्रस्तुत किए गए आधिकारिक प्रस्ताव की प्रति से यह साफ हो गया है कि आखिरकार इन सांसदों ने अचानक ‘मातोश्री’ का साथ क्यों छोड़ा।
एबीपी न्यूज की रिपोर्ट्स के अनुसार, बागी सांसदों ने अपने प्रस्ताव में दावा किया है कि उन्हें इस बात की प्रबल आशंका थी कि आने वाले समय में शिवसेना यूबीटी का पूरी तरह से कांग्रेस में विलय कर दिया जाएगा। इस चौंकाने वाले खुलासे ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है।
‘कांग्रेस में विलय के लिए नहीं हुआ था पार्टी का जन्म’
बागी सांसदों द्वारा पारित और हस्ताक्षरित इस गुप्त प्रस्ताव में वैचारिक मतभेदों का खुलकर जिक्र किया गया है। प्रस्ताव में साफ तौर पर लिखा गया है कि वंदनीय हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना कांग्रेस की नीतियों के विरोध में और प्रखर हिंदुत्व के लिए की थी, न कि भविष्य में कभी कांग्रेस के साथ विलीन होने के लिए। सांसदों ने आरोप लगाया कि मौजूदा शीर्ष नेतृत्व जिस तरह से अपनी मूल विचारधारा से समझौता कर रहा था, उससे दल के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा था। इसी टूटते भरोसे और वैचारिक भटकाव के कारण सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से अपना विश्वास पूरी तरह खत्म होने की बात कही है।
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संजय राउत के ‘TMC’ वाले बयान से भड़के सांसद
प्रस्ताव के मुताबिक, इस ऐतिहासिक बगावत की पटकथा के पीछे शिवसेना यूबीटी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत का एक हालिया बयान भी बेहद जिम्मेदार रहा है। सांसदों ने प्रस्ताव में सीधे तौर पर राउत के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा है कि कुछ समय पहले संजय राउत ने सार्वजनिक मंच से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कांग्रेस में विलय करने की अजीब सलाह दी थी। राउत के इस बयान के बाद से ही इन 6 सांसदों के भीतर यह डर घर कर गया था कि जो नेता दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों को कांग्रेस में मिलने की सलाह दे रहे हैं, वे भविष्य में अपनी खुद की पार्टी शिवसेना यूबीटी का विलय भी कांग्रेस में करा सकते हैं।
सीधे एकनाथ शिंदे की ‘शिवसेना’ में होगा आधिकारिक विलय
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और कानूनी रूप से मजबूत पहलू यह है कि इन बागी सांसदों ने खुद को लोकसभा में किसी नए या स्वतंत्र समूह (Independent Group) के रूप में मान्यता देने की मांग नहीं की है। उनके द्वारा पारित कानूनी प्रस्ताव के अनुसार, वे सभी 6 सांसद सीधे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली ‘शिवसेना’ में शामिल हो रहे हैं। मीडिया में अब तक चल रही ‘अलग गुट’ की अटकलों के विपरीत, बागी धड़े का स्पष्ट दावा है कि दो-तिहाई बहुमत होने के कारण उनका यह कदम तकनीकी और कानूनी रूप से मूल शिवसेना में सीधा विलय (Merger) माना जाएगा, जिससे उनकी संसद सदस्यता पर कोई आंच नहीं आएगी।
