मुंबई के रे रोड ROB की बढ़ी लागत पर सवाल: उद्घाटन के एक साल में 18 करोड़ अतिरिक्त खर्च का मामला अटका

Mumbai Reay Road Project: मुंबई के रे रोड रेलवे ओवर ब्रिज की लागत 190 करोड़ से बढ़कर 208 करोड़ रुपये हुई। बीएमसी स्थायी समिति ने अतिरिक्त 18 करोड़ रुपये की मंजूरी का प्रस्ताव फिलहाल टाला।
Reay Road railway over bridge project cost escalates from Rs 190 crore to Rs 208 crore. BMC standing committee puts the additional Rs 18 crore proposal on hold.
रे रोड रेलवे ओवर ब्रिज (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Mumbai Reay Road Railway Over Bridge: मुंबई हार्बर लाइन पर स्थित रे रोड रेलवे स्टेशन के नए रेलवे ओवर ब्रिज के उद्घाटन को अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन परियोजना की लागत बढ़ाने का मामला अब बीएमसी की स्थायी समिति तक पहुंच गया है। पहले 190 करोड़ रुपये की स्वीकृत इस परियोजना की लागत अब बढ़कर 208 करोड़ रुपये हो गई है। अतिरिक्त 18 करोड़ रुपये की मंजूरी के लिए प्रशासन ने प्रस्ताव रखा, हालांकि समिति ने इस पर तत्काल निर्णय लेने के बजाय फिलहाल इसे लंबित रखने का फैसला किया है।

रे रोड का पुराना रेलवे पुल करीब 112 वर्ष पुराना था और ब्रिटिश शासनकाल में बनाया गया था। उसकी जगह नए पुल का निर्माण महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमआरआईडीसीएल) द्वारा कराया गया।

यह संस्था महाराष्ट्र सरकार और भारतीय रेलवे का संयुक्त उपक्रम है। परियोजना के निर्माण का पूरा वित्तीय भार बीएमसी ने वहन किया, जबकि निर्माण की जिम्मेदारी एमआरआईडीसीएल के पास थी। इस परियोजना का ठेका वर्ष 2019 में दिया गया था और उस समय इसकी अनुमानित लागत 190 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मई 2025 में मुख्यमंत्री ने नए पुल का लोकार्पण किया था।

डिजाइन और तकनीकी ढांचे में किए गए संशोधन

अब उद्घाटन के लगभग एक वर्ष के भीतर परियोजना लागत में 18 करोड़ रुपये की वृद्धि का प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष विचार के लिए रखा गया है। एमआरआईडीसीएल ने अतिरिक्त लागत के पीछे कई कारण बताए है। बीएमसी के अनुसार मुंबई रेलवे अधिकारियों के निर्देश पर पुल के डिजाइन और तकनीकी ढांचे में आवश्यक संशोधन किए गए। इसके साथ ही एप्रोच रोड का विस्तार करना पड़ा तथा यातायात पुलिस द्वारा सुझाए गए बदलावों के अनुरूप भी अतिरिक्त निर्माण कार्य किए गए।

इन सभी संशोधनों और अतिरिक्त कार्यों के चलते परियोजना की कुल लागत बढ़कर 208 करोड़ रुपये पहुंच गई। बीएमसी प्रशासन का कहना है कि इन अतिरिक्त कार्यों पर हुए व्यय को प्रशासक स्तर से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब नियमानुसार इस खर्च को कार्योत्तर स्वीकृति दिलाने मला स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। बुधवार को हुई समिति की बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा तो हुई, लेकिन समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने इस पर अंतिम निर्णय फिलहाल टाल दिया।

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