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6 दिन डूबा रहा वसई-विरार, मानसून तैयारियों में फिर फेल VVMC, लोगों का आरोप- रील बनाते रहे जनप्रतिनिधि
- Written By: रूपम सिंह
Nalasopara Vasai Virar Flood Crisis: वसई-विरार और नालासोपारा में भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात। IIT बॉम्बे की रिपोर्ट पर 6 साल बाद भी अमल न करने को लेकर घिरी मनपा; जनता बदहाल।

डूब रहा वसई-विरार (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Vasai Virar Heavy Rains: शुक्रवार देर रात से ही मूसलाधार बारिश ने वसई, नालासोपारा व विरार के लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, वसई विरार महानगरपालिका (वीवीएमसी) मानसून तैयारियों को लेकर हर वर्ष की तरह बुरी तरह फेल साबित हुई। वसई व विरार के अलावा नालासोपारा पूर्व व पश्चिम इलाके में भारी बारिश का कहर जबरदस्त देखने को मिला। शनिवार से ही जलजमाव होने लगा और वह बढ़ता चला गया। बिजली विभाग ने एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद कर दी।
सड़क, दुकानें व बिल्डिंग सब जलमग्न हो गए। शाम होते ही सड़कों पर गुप्प अंधेरा छा गया। गौरतलब है कि संकट के इस घड़ी में मनपा के एक भी कर्मचारी नालासोपारा पश्चिम इलाके में दिखाई नहीं दिए। नालासोपारा के स्थानीय एमएलए राजन नाईक, किसी भी पार्टी के नगरसेवक या मनपा कर्मचारी किसी ने भी जल निकासी का प्रयत्न नहीं किया और कुदरत का कहर मानते हुए हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जब नगरसेवक व एमएलए को पानी निकालने का प्रबंध करना चाहिये तब वे बारिश में रील बनवा रहे थे। जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह से लेकर बुधवार देर रात तक नालासोपारा, वसई व विरार के कई इलाकों में पानी भर गया जिसके बाद बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई। कई बिल्डिंगों में ग्राउंड फ्लोर तक पानी भर गया जिसके बाद नीचे रहने वाले लोगों को दूसरी जगह शरण लेनी पड़ी।
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पानी में चलकर लाना पड़ा बच्चों के लिए दूध
सड़कों पर कमर तक पानी भर गया जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई इलाकों में पीने के पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी, और दूध की सप्लाई भी बाधित हुई, जिससे बच्चों को खासकर असुविधा का सामना करना पड़ा।
नालासोपारा पश्चिम में रहने वाले चेतन कांबले ने बताया कि उनके घर में बच्चे है इस वजह से दूध की जरूरत रहती है। कांबले ने बताया कि उन्हें मजबूरन कमर तक पानी में चलकर दूध लेने सड़क पर पहुंचे जहां दूध 150 रुपये लीटर बेचा जा रहा था। इसके अलावा आलू, प्याज के दाम में भी भारी बढ़ोतरी हुई। आमतौर पर आलू जहां 20 से 25 रुपये किलो बिकते है वह इस आपदा में 50 से 60 रुपये किलो पहुंच गए।
किसी ने नहीं ली सुध
स्थानीय निवासी विशाल शुक्ला ने बताया कि हर वर्ष मानसून के दौरान यही हाल होता है। लोगों के घरों में पानी आ जाता है। सड़के पानी से लबालब भर जाती है। ट्रेन रुक जाती है लेकिन मनपा को फर्क नहीं पड़ता। यहां के अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होते है। वहीं विजय पाटिल ने बताया कि पिछले 5 दिनों से बिजली नहीं है, लोग मच्छरों के बीच रह रहे है। सड़कों पर पानी कम नहीं हो रहा है लेकिन सरकार हाथ पर हाथ रख बैठी है। कोई आम जनता की सुध नहीं ले रहा है।
वीवीएमसी आयुक्त का लापहरवाह रवैया
नवभारत संवाददाता ने जब वीवीएमसी आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी. से बात कर आईआईटी की रिपोर्ट पर काम क्यों नहीं किया गया, इस संबंध पर सवाल पूछा, तो उन्होंने बाढ़ को प्राकृतिक आपदा करार कर फोन रख दिया। उन्होंने अवैध निर्माण, ड्रेनेज नेटवर्क को दुरुस्त करने पर बातचीत करने से मना कर दिया।
यह भी पढ़ें:- सड़क सुरक्षा पर सख्त हुई ट्रैफिक पुलिस: मीरा-भाईंदर में बढ़ते हादसों पर MBMC, MMRDA और NHAI से मांगा जवाब
आईआईटी बॉम्बे व नीरी की रिपोर्ट बनी कागज की रद्दी
ज्ञात हो कि वर्ष 2018 में वसई विरार में बाढ़ आई थी, तब भी हालात खराब थे। आनन फानन में प्रशासन ने कहा कि आईटीआई बॉम्बे व नीरी को 12 करोड़ रुपये देकर वसई- नालासोपारा व विरार इलाके का निरीक्षण कराया जाएगा, ताकि नालों व सड़को की चौड़ाई पर काम हो सके।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में आईटीआई बॉम्बे नीरी ने रिपोर्ट वीवीएमसी को सौंप दी और 8 से 10 कलवर्ट व 3 होल्डिंग पोंड बनाने के लिए कहा था ताकि ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूती प्रदान कर सकें, लेकिन 6 वर्ष से अधिक का
समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट के एक पॉइंट को भी वीवीएमसी अमल नहीं कर पाई। गुरुवार वीवीएमसी कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद (प्रेस कॉन्फ्रेंस) में मंत्री गणेश नाईक, एमएलए राजन नाईक व स्नेहा दुबे वीवीएमसी को बचाते नजर आए और बाढ़ की समस्या को प्राकृतिक आपदा ठहरा दिया, लेकिन बाद में जब नाईक व दुबे से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इसके लिए वीवीएमसी को जिम्मेदार ठहराया।
वसई-पिछले 6 दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने वसई-विरार इलाके में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया, बारिश थमने से कुछ इलाकों को तो राहत मिली है, लेकिन वसई पूर्व का मीठागर इलाका अब भी पूरी तरह डूबा हुआ है।
- नालासोपारा एमएलए राजन नाईक ने बाताया की इस संबंध में मुख्यमंत्री जल्द ही है। इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। मैं मानता हूं कि आईआईटी बॉम्बे व नीरी ने जो सुझाव दिए थे, जैसे नालों की गहराई बढ़ाना, सड़क चौड़ी करना, कलवर्ट व होल्डिंग पॉड बनाना यह अब तक नहीं बन सका है, लेकिन जल्द ही काम शुरू होगा।
- एमएलए वसई स्नेहा दुबे ने बाताया की वर्ष 2019 में आईआईटी बॉम्बे व नीरी ने रिपोर्ट जारी की थी, तब से लेकर 6 वर्ष बीत गए लेकिन वीवीएमसी ने काम शुरू नहीं किया। अगर बजट को लेकर कुछ समस्या थी, तो राज्य सरकार से मदद मांगते। यह बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होना वीवीएमसी की विफलता है। इनके पास सक्षम अधिकारी नहीं है। मैं यही कोशिश कर रही हूं कि इनके पास सक्षम अधिकारी रहे, जो बाढ़ रोकने की तैयारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर काम करें।
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