सहकारी बैंकों में 10 साल से ज्यादा निदेशक नहीं रह सकेंगे, 3 साल का कूलिंग-ऑफ अनिवार्य
Cooperative Bank Director Tenure: आरबीआई ने सहकारी बैंकों के संचालन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले निदेशकों के लिए 3 वर्ष का कूलिंग-ऑफ पीरियड अनिवार्य कर दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
RBI सहकारी बैंक नियम (सौ. सोशल मीडिया )
Cooperative Bank Director Tenure Cooling Off Rule: देश में बैंकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने सहकारी बैंकों के खिलाफ एक बहुत बड़ा और कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। रिजर्व बैंक ने शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के सहकारी बैंकों के 33 गवर्नेस (संचालन) नियमों को तत्काल प्रभाव से बेहद सख्त कर दिया है।
आरबीआई की तरफ से जारी नए आदेश के अनुसार अब सहकारी बैंकों का कोई भी निदेशक लगातार 10 साल तक बोर्ड में रहने के बाद उसी बैंक में दोबारा चुनाव या सह-योजन के जरिए तब तक निदेशक नहीं बन सकता जब तक वह 3 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड पूरा न कर ले। सरकार और आरबीआई ने यह कदम उन निदेशकों को रोकने के लिए उठाया है – जो नियमों की कमियों का फायदा उठाकर हेरफेर कर रहे थे।
कानून को ठेंगा दिखाने वाले ‘लूपहोल’ को किया बंद
बैंकिग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 ने शहरी सहकारी बैंको राज्य सहकारी बैंकों और केंद्रीय सहकारी बैंकों के निदेशकों के अधिकतम लगातार कार्यकाल को 8 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया था लेकिन आरबीआई ने जांच में पाया कि कुछ निदेशक इस कानून का गलत फायदा उठा रहे थे। आरबीआई ने नए नियमों में पैराग्राफ 7ए जोड़कर इस चौर दरवाजे को हमेशा के लिए बंद कर दिया है।
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एकाधिकार होगा खत्म
- माना जा रहा है कि सहकारी बैंकिग क्षेत्र में कुछ परिवारों और व्यक्तियों के एकाधिकार को खत्म करने के लिए आरबीआई ने यह नियम लागू किया है।
- इस नियम से उन राजनीतिक नेताओं पदाधिकारियों और लंबे समय से निदेशक बने हुए लोगों को बड़ा झटका लगेगा है जो वर्षों से बैंकों पर प्रभाव बनाए हुए थे।
- सहकार क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार राज्यभर की विभिन्न सहकारी बैंकों में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से लगातार निदेशक पद पर रहने वालों की संख्या लगभग 6,000 हो सकती है।
