‘हम दो हमारे दो का बोर्ड लगाएं उद्धव ठाकरे…’ सचिन अहीर के शिंदेसेना में जाने पर राम कदम का जबरदस्त वार
Ram Kadam Statement: सचिन अहीर के शिंदेसेना में शामिल होने पर बीजेपी विधायक राम कदम का उद्धव ठाकरे पर तीखा तंज। कहा- ठाकरे गुट में अब कोई नहीं रहना चाहता, दफ्तर पर लगा लें हम दो हमारे दो का बोर्ड।
- Written By: गोरक्ष पोफली
राम कदम का स्टेटमेंट (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Ram Kadam Attacks Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल और जुबानी जंग का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में सचिन अहीर के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के विधायक राम कदम ने उद्धव ठाकरे और उनके नेतृत्व वाले ठाकरे गुट पर तीखा हमला बोला है। राम कदम ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि अब उद्धव ठाकरे को अपने कार्यालय के बाहर हम दो, हमारे दो का बोर्ड लगा लेना चाहिए।
राम कदम के इस बयान का सीधा इशारा उद्धव ठाकरे और राज्यसभा सांसद संजय राउत की ओर माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि ठाकरे गुट के भीतर कई नेता संजय राउत की कार्यशैली और उनके बढ़ते प्रभाव से नाखुश हैं। कइयों का मानना है कि संजय राउत का पार्टी का केंद्र बिंदु बन जाना ही पुराने और कद्दावर नेताओं के पार्टी छोड़ने का मुख्य कारण है। राम कदम ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे के साथ अब कोई रहना नहीं चाहता और धीरे-धीरे सभी उनका साथ छोड़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति रही, तो उद्धव ठाकरे की इस डूबती नाव से जल्द ही सभी नेता उतर जाएंगे।
आत्मचिंतन के बजाय अहंकार का आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ठाकरे गुट के नेताओं पर यह आरोप लग रहा है कि वे पार्टी में हो रही इस बड़ी गिरावट पर आत्मचिंतन करने के बजाय अहंकारी बयान दे रहे हैं। राम कदम ने कहा कि जब भी कोई बड़ा नेता साथ छोड़ता है, तो ठाकरे गुट की ओर से यह कहा जाता है कि हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।
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पार्टी छोड़ने वाले काई स्कूल के बच्चे नहीं हैं
इस विषय पर बालते हुए राम कदम ने आगे कहा कि पार्टी छोड़ने वाले नेता कोई स्कूल के बच्चे नहीं हैं, बल्कि वे लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद और विधायक हैं। उदाहरण के तौर पर, 20 लाख लोगों द्वारा चुने गए सांसद और 5 लाख लोगों द्वारा चुने गए विधायक यदि पार्टी छोड़ रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि नेतृत्व में कहीं न कहीं गंभीर खामी है। यदि नेतृत्व इस अहंकार में रहता है कि मेरी कोई गलती नहीं है, तो नेताओं का पलायन कभी नहीं थमेगा।
इतिहास की पुनरावृत्ति और भविष्य की चुनौती
शिवसेना के इतिहास का हवाला देते हुए यह भी रेखांकित किया गया है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के कारण ही अतीत में राज ठाकरे, नारायण राणे और हाल ही में एकनाथ शिंदे जैसे बड़े नेताओं को पार्टी छोड़नी पड़ी। राज ठाकरे जैसे नेताओं की पार्टी छोड़ने की कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं कि उन्हें अलग होना पड़ा।
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अब देखना यह होगा कि अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए पहचाने जाने वाले संजय राउत, राम कदम के इस हम दो, हमारे दो वाले वार पर क्या पलटवार करते हैं। क्या ठाकरे गुट वाकई आत्मचिंतन करेगा या फिर कोई फर्क नहीं पड़ता वाले रुख पर कायम रहकर और अधिक नेताओं को खोने का जोखिम उठाएगा?
