राज ठाकरे, इनसेट- बाबासाहेब आंबेडकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Raj Thackeray Social Media Post On Ambedkar Jayanti: आज पूरे देश और महाराष्ट्र में भारतीय संविधान के शिल्पकार, भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती बड़े उत्साह के साथ मनाई जा रही है। मुंबई के चैत्यभूमि पर अनुयायियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। राज्यपाल विष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व सुनेत्रा पवार ने चैत्यभूमि पर जाकर बाबासाहेब को नमन किया। इसी बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर बाबासाहेब को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और वर्तमान राजनीति व समाज पर तीखा प्रहार किया।
राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट में इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज महापुरुषों को केवल मूर्तियों, जातियों और शोर-शराबे वाले जुलूसों तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज, बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा फुले और सावरकर जैसे महान नेताओं को जातियों में बांटना और उनकी जयंती पर कर्कश DJ लगाकर जुलूस निकालना ही सच्ची श्रद्धांजलि नहीं है। जब हम इस दिखावे से बाहर निकलेंगे, तभी हम उनके विचारों के साथ न्याय कर पाएंगे।
आज भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांची जयंती. त्यानिमित्त त्यांच्या स्मृतीस महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेचं विनम्र अभिवादन.
भारतीय राज्य घटनेचे शिल्पकार म्हणून बाबासाहेबांचं या देशासाठी दिलेलं योगदान अतुलनीयच आहे आणि या देशाच्या येणाऱ्या पिढ्या त्याबद्दल त्यांच्या ऋणात राहतील. पण… pic.twitter.com/3o6d1QS4kU — Raj Thackeray (@RajThackeray) April 14, 2026
राज ठाकरे ने बाबासाहेब को केवल एक सामाजिक नेता नहीं, बल्कि एक प्रखर अर्थशास्त्री के रूप में याद किया। उन्होंने उनके प्रसिद्ध ग्रंथ ‘द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी: इट्स ओरिजिन एंड इट्स सॉल्यूशन’ का जिक्र करते हुए कहा कि आज जब रुपया कमजोर हो रहा है, तब बाबासाहेब के आर्थिक विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। उन्होंने याद दिलाया कि बाबासाहेब के सुझाव ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना का आधार बने थे।
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वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर कटाक्ष करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि आज की सरकारें विकास का मतलब केवल फ्लाइओवर, सड़क और सरकारी मदद तक सीमित समझती हैं। जबकि बाबासाहेब आंबेडकर का विजन समाज के अंतिम व्यक्ति के आर्थिक और सामाजिक उत्थान का था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज के सत्तालोभी राजनीतिज्ञ महापुरुषों के विचारों को पैरों तले रौंद रहे हैं और केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए उनका उपयोग कर रहे हैं। ठाकरे ने अंत में युवाओं और समाज से आह्वान किया कि महापुरुषों को जातियों के चश्मे से देखना बंद करें और उनके समग्र दृष्टिकोण को समझकर देश के विकास में योगदान दें।