राकांपा का अंदरूनी लेटर वॉर बना जीशान सिद्दीकी के लिए काल, क्या सुनेत्रा पवार की एक गलती से छिन जाएगी विधायकी?

Sunil Tatkare AB Form controversy: महाराष्ट्र की NCP में मचे घमासान के कारण MLC जीशान सिद्दीकी की विधायकी खतरे में पड़ गई है। सुनेत्रा पवार द्वारा चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र ने बढ़ाई मुश्किलें।
NCP's Internal 'Letter War' Proves to be Zeeshan Siddique's Undoing; Will Sunetra Pawar's Single Blunder Cost Him His MLA Seat?
MLC जीशान सिद्दीकी (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Zeeshan Siddique MLC Membership In Danger: महाराष्ट्र की सियासत में राकां (अजित पवार) के भीतर चल रहा आंतरिक गतिरोध अब खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी की कमान संभाल रहीं राष्ट्रीय अध्यक्षा सुनेत्रा पवार द्वारा केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजे गए पत्रों ने संगठन के भीतर असंतोष की आग को भड़का दिया है। सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि 28 जनवरी से 10 मार्च के बीच हुए किसी भी पत्राचार को मान्य न किया जाए। इसके साथ ही 29 अप्रैल को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को लेकर भेजे गए पत्र में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कद्दावर नेताओं के पदों का कोई जिक्र नहीं होने से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में भारी नाराजगी है।

इस सांगठनिक उठापटक के बीच विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) और युवा नेता जीशान सिद्दीकी की विधायकी पर कानूनी और तकनीकी संकट मंडराने लगा है। जानकारों के मुताबिक यह पूरा मामला जीशान सिद्दीकी के चुनाव नामांकन के दौरान जमा किए गए 'एबी फॉर्म' की वैधता से जुड़ा है। पार्टी में मचे इस घमासान के कारण सिद्दीकी की सदस्यता अयोग्य घोषित होने की संभावना बन गई है।

प्रदेशाध्यक्ष पद और एबी फॉर्म का विवाद

दरअसल, पूरा विवाद सुनील तटकरे के प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर खड़ा हुआ है। सुनेत्रा पवार द्वारा 29 अप्रैल को चुनाव आयोग को भेजे गए आधिकारिक पत्र में तटकरे के नाम के आगे 'प्रदेशाध्यक्ष' नहीं लिखा गया था और इस पत्र को ही अंतिम पत्राचार मानने को कहा गया था। इसके ठीक दूसरे दिन, 30 अप्रैल को जीशान सिद्दीकी ने जो एबी फॉर्म जमा किया, उस पर सुनील तटकरे ने बतौर 'प्रदेशाध्यक्ष' हस्ताक्षर किए थे। एक तरफ चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में तटकरे के पद का उल्लेख न होना और दूसरी तरफ उसी पद के नाम पर एबी फॉर्म जारी करना, सिद्दीकी के लिए बड़ी कानूनी मुसीबत बन गया है।

सुनेत्रा पवार की सफाई

कार्यकारिणी की इस सूची में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबळ और हसन मुश्रीफ जैसे दिग्गजों को जगह न मिलने से मचे बवाल पर सुनेत्रा पवार ने सफाई दी है। उन्होंने मीडिया के सामने माना कि यह एक तकनीकी चूक है और जल्द ही चुनाव आयोग को एक संशोधित सूची भेजी जाएगी। हालांकि, इस तकनीकी भूल ने विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा कानूनी मुद्दा दे दिया है।

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