कहीं आपके साथ ट्रेन में सफर तो नहीं कर रहे किंग कोबरा! जनशताब्दी एक्सप्रेस में मिला अजगर, क्या है इसकी वजह?
Python In Train: जनशताब्दी एक्सप्रेस में एक अजगर का बच्चा मिला है। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रेनों में अगजर और किंग कोबरा जैसे सांप कहीं सफर तो नहीं कर रहे हैं। जानिए क्या है इसका कारण।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आकाश मसने
जनशताब्दी एक्सप्रेस में मिला अजगर (डिजाइन फोटो)
Snakes Traveling On A Train: देश की जीवनवाहिनी कही जाने वाले भारतीय रेल में यात्रियों के साथ सफर करते हुए गाहे बगाहे चूहे, तिलचट्टे व अन्य जीव जंतु दिख जाते हैं, परंतु सोचिए यदि उसी ट्रेन में आपके साथ किंग कोबरा या अजगर सफर कर रहा हो तो क्या स्थिति होगी? हम यात्रियों को डरा नहीं रहे हैं, बल्कि यह सच्चाई है कि ट्रेनों में सांप, अजगर सैकड़ों किमी की यात्रा कर रहे हैं।
गोवा से आने वाली ट्रेन में मिला अजगर का बच्चा
ट्रेन में अजगर होने की ताजा घटना सामने आई है। बुधवार को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के प्लेटफॉर्म नंबर 11 पर ट्रेन नंबर 12052 मडगांव-सीएसएमटी जनशताब्दी एक्सप्रेस रात इंजन 12.45 बजे पहुंची। इसमें एक अजगर का बच्चा देखा गया। जनशताब्दी एक्सप्रेस के इंजन नंबर 22936/SRC/CAB2/WAP4 के लोको पायलट एन. के. परसोया ने ‘कैब नंबर 2’ में एक अजगर का बच्चा देखा। उन्होंने लोको पायलट ओमप्रकाश राम को बताया। संबंधित अधिकारियों को भी इस बारे में जानकारी मिलने और सूचना देने पर राज्य के ऑनरेरी एनिमल वेलफेयर ऑफिसर, अभिषेक अशोक ठावरे तुरंत मौके पर पहुंचे।
रेलवे ऑपरेशन में बिना किसी रुकावट के, अजगर के बच्चे को सुबह करीब 1:40 बजे सुरक्षित बचा लिया गया। बाद में उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। बताया गया कि वह भारत में पाया जाने वाला ‘इंडियन रॉक पायथन’ बिना विष वाला सांप है। यह इंडियन वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत एक सुरक्षित प्रजाति है।
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पश्चिमी घाट सांपों के प्राकृतिक स्थल
उल्लेखनीय है कि भारत के पश्चिमी घाट के घने जंगल किंग कोबरा सहित अन्य सांप के प्राकृतिक आवास हैं। किंग कोबरा जैसे सांप आमतौर पर जंगलों में ही रहते हैं, क्योंकि उसे वहां शिकार, पानी और सुरक्षित स्थान मिल जाता है।
हालांकि एक ऐसा अध्ययन सामने आया है, जिससे जंगलों में रहने वाले किंग कोबरा और अन्य सांप रेलवे लाइनों के पास भोजन व शिकार की खोज में तो कभी कभी ट्रेनों में पहुंच जा रहे हैं। सूरत के वैज्ञानिक और सरीसृप विशेषज्ञ दिकांश परमार ने एक अनोखा शोध किया है। उनके अध्ययन से पता चला है कि भारत में नागराज किंग कोबरा सहित अजगर संभवतः ट्रेनों में भी सफर कर रहे हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि गोवा जाने वाली कई रेल लाइनें घने जंगलों से होकर गुजरती हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि सांप अजगर कभी-कभी शिकार या आश्रय की तलाश में पटरियों या ट्रेनों के पास आ जाते हैं। इस तरह वे प्रकृति से दूर ऐसे इलाकों में पहुंच जाते हैं जहां उनके लिए मुश्किल हो जाती है।
ट्रेन में सांप के मिलने कारण व बचाव (सोर्स: AI)
गौरतलब है कि वैज्ञानिक और सरीसृप विशेषज्ञ दिकांश परमार का शोध प्रतिष्ठित पत्रिका ‘बायोट्रोपिका’ में भी प्रकाशित हो चुका है, जो अमेरिका की पारिस्थितिकी और उसके संरक्षण और प्रबंधन विषयों पर शोध को कवर करती है। इस पत्रिका में प्रकाशित शोध में संभावना व्यक्त की गई है कि दुनिया का सबसे लंबा विषैला सांप, किंग कोबरा (ओफियोफैगस कालिंगा) भी अनजाने में लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा कर रहा होगा। इस अध्ययन से पता चलता है कि किंग कोबरा सहित सांप प्रजाति की सुरक्षा, संरक्षण की चुनौती सभी के लिए है।
गोवा में किंग कोबरा के 47 स्थानों का अध्ययन
दिकांश परमार ने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम के साथ मिलकर गोवा में किंग कोबरा के 47 स्थानों का अध्ययन किया, जिनमें से अधिकांश पश्चिमी घाट के दूरस्थ जंगलों में स्थित हैं। गोवा में पांच रेलवे स्टेशनों के पास भी किंग कोबरा मिले हैं।
पिछले वर्षों में गोवा एनिमल रेस्क्यू स्क्वाड के सदस्य रिंकू ने गोवा के चंदोर रेलवे स्टेशन के पास मिले एक किंग कोबरा को बचाया था। दिकांश परमार ने गोवा के पशु बचाव दल द्वारा बचाए गए 47 स्थानों का अध्ययन किया। इनमें से 18 स्थान उत्तरी गोवा में और 29 स्थान दक्षिणी गोवा में थे।वैज्ञानिकों को संदेह था कि सांपों की अन्य प्रजातियां भी पश्चिमी घाट में होंगी।
भाेजन की तलाश में बाहर निकलते हैं सांप
अध्ययन में पाया गया कि ये सभी स्थान या तो रेलवे स्टेशन के पास थे या रेलवे लाइन के पास थे। उनके अनुसार “गोवा स्थित पशु बचाव दल ने 2002 से 2024 तक कुल 120 किंग कोबरा सांपों को बचाया। यहां जंगल होने से सांप ज्यादा हैं और वे गाहे बगाहे शिकार या भोजन की खोज रेल पटरियों स्टेशनों से होते हुए ट्रेन में भी पहुंच जाते हैं। इस तरह सैकड़ों किमी की यात्रा करते हुए दूर पहुंच जाते हैं।
अध्ययन के अनुसार किंग कोबरा कर्नाटक के कैसल रॉक और दांडेली टाइगर रिज़र्व में पाया जाता है। अब जब ये ट्रेनें गोवा में प्रवेश करती हैं, तो सांप इस क्षेत्र में रुक जाते हैं। सितंबर 2021 में, गोवा पशु बचाव दल ने वास्को-डि-गामा के पास एक कोबरा को बचाया था। यह रेलवे स्टेशन से मात्र 200 मीटर की दूरी पर मिला था। लोलिम, पालोलेम और पेडणे रेलवे स्टेशनों के आसपास भी तीन अन्य कोबरा पाए गए थे।
जानकारों के अनुसार, ये सभी पांच स्थान किंग कोबरा के प्राकृतिक आवास नहीं थे, जिसके कारण शोधकर्ताओं को सांप और रेल के बीच यह ‘आश्चर्यजनक संबंध’ देखने को मिला है। सांप ट्रेन से एक जगह से दूसरे जगह पहुंच जा रहे हैं। बुधवार को सीएसएमटी पर जन शताब्दी के इंजन में पाया गया अजगर का बच्चा सम्भवतः गोवा की तरफ से आया।
बारिश के समय में अजगर देते हैं अंडे
यह समय अजगर के अंडे देने का होता है। यह अजगर के अंडों से बच्चे निकलने का समय होता है। मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में मानसून के आने पर, वन्यजीव अक्सर इंसानी बस्तियों या दूसरी सुरक्षित लगने वाली जगहों पर शरण लेते हैं। ऐसा अनुमान भी है कि अजगर का बच्चा बारिश से बचने या शरण लेने के लिए ट्रेन के इंजन में घुस गया होगा। इस तरह इस जगह पर पहुंच गया होगा।
चूहे व भोजन की खोज में यात्रा!
अध्ययन से यह भी पता चला है कि किंग कोबरा या अन्य सांप कभी-कभी जंगली पहाड़ी रेलवे यार्ड में चूहों या अन्य कीड़ों का शिकार करते समय मालगाड़ियों या यात्री ट्रेनों में चढ़ जाते हैं, और अनजाने में सैकडों किलोमीटर दूर अनुपयुक्त परिस्थितियों में पाए जा रहे हैं।
शोध में यह भी पता चला कि आमतौर कर्नाटक के पास के जंगलों में किंग कोबरा जैसे सांपों की प्रजातियां पाई जाती हैं वे सांप गोवा के रेलवे स्टेशनों के आस-पास देखे गए थे। इसलिए यह निष्कर्ष निकाला गया कि वे किसी कारणवश रेलवे के रास्ते गोवा के आस-पास पहुंचे होंगे। 2017 में सूरत रेलवे स्टेशन से इसी तरह एक सांप को बचाया गया था जो ट्रेन से सफर कर वहां तक पहुंचा था।
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जानकारों का कहना है कि अनाज, फल या अन्य पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के बिखरे होने के कारण रेलवे ट्रैक के आसपास चूहों का जमावड़ा हो जाता है। चूहे वहां बड़ी संख्या में रहते हैं और वे सांपों के पसंदीदा भोजन भी हैं। भोजन की तलाश के अलावा बरसात के मौसम में बाढ़ आने की स्थिति में वे सुरक्षित आश्रय पाने के लिए ट्रेनों में भी शरण ले सकते हैं। यदि वे मालगाड़ियों या यात्री ट्रेनों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तो यह मानव और खुद उनके लिए भी खतरनाक है।
वन क्षेत्रों में ट्रेनों को न रोकने की सलाह
शोधकर्ता का कहना है कि ट्रेनों को वन क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाना चाहिए। इसके अलावा ट्रेनों के डिब्बों में बचा हुआ खाना नहीं रखा जाना चाहिए। इससे चूहे बढ़ते हैं और फिर उनके पीछे सांप व अन्य जीव जंतु आ सकते हैं। यदि सांप ट्रेनों में अड्डा बना रहे हैं तो इस मामले में जागरूकता और साफ़ दिशा-निर्देशों की ज़रूरत भी है।
रेलवे का मानना है कि ऐसी घटनाएं मानसून के दौरान या किसी भी अन्य समय हो सकती हैं। ऐसे में नागरिकों को घबराना नहीं चाहिए या सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि तुरंत फॉरेस्ट डिपार्टमेंट या किसी ट्रेंड स्नेक कीपर से संपर्क करना चाहिए। वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन और ह्यूमन सेफ्टी, दोनों का ध्यान रखते हुए इस तरह का रेस्क्यू ऑपरेशन करना जरूरी है। सेंट्रल रेलवे अपने लोकोमोटिव स्टाफ की मुस्तैदी और एनिमल वेलफेयर ऑफिसर्स की समय पर मदद की सराहना भी की है।
