धारावी प्रोजेक्ट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
मुंबई: एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी और इसके आसपास के क्षेत्र में झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण और डीआरपी के माध्यम से नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा सर्वेक्षण स्थानीय निवासियों द्वारा समर्थन प्राप्त कर रहा है। इस सर्वेक्षण के जरिए धारावी के पुनर्विकास की दिशा में अहम कदम उठाए जा रहे हैं।
वर्षों से रिडेवलपमेंट का इंतजार कर रहे धारावी के निवासी अब चाहते हैं कि जल्द से जल्द पुनर्विकास कार्य शुरू हो, ताकि उन्हें बुनियादी सुविधाओं से युक्त घरों में रहने और अच्छी जिंदगी बसर करने का अवसर मिल सके। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रोजेक्ट का विरोध करने वाले पहले यहां की गंदगी और कठिन परिस्थितियों में रहकर दिखाएं, फिर विरोध करें।
सर्वेक्षण और पंजीकरण के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया और प्रोजेक्ट के विरोध में कुछ दुष्प्रचार किया जा रहा है, जिसे स्थानीय निवासियों ने नकारा है। उनका कहना है कि कोई भी नागरिक सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए दबाव में नहीं है। इसके विपरीत, निवासी खुद इस कार्य में भाग लेने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे गंदगी और असुविधाओं का सामना कर रहे हैं और अब उन्हें पुनर्विकास की सख्त जरूरत है। कुछ लोग सर्वेक्षण में रुकावट डालने की कोशिश करते हैं, लेकिन स्थानीय लोग उन्हें हटा देते हैं।
कई नागरिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण में कोई बल प्रयोग नहीं किया जा रहा है और यह पूरी प्रक्रिया स्वेच्छा से की जा रही है। धारावी के निवासियों का कहना है कि 40 साल में विरोध करने वालों ने धारावी के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, और अब उन्हें इस गंदगी में रहकर यह साबित करना चाहिए कि वे यहां रहने के लिए तैयार हैं।
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स्थानीय निवासी सलमान बोले-
‘धारावी में जन्मे और यहां व्यापार करने वाले हम जैसे लोगों के लिए, विकास ही समृद्धि का रास्ता है। पहले इस परियोजना को लेकर कुछ संदेह था, लेकिन अब हमें समझ में आ गया है कि यह बदलाव हमारे व्यापार और घर दोनों के लिए फायदे की दिशा में है। इस सर्वे से हमें कोई समस्या नहीं है, क्योंकि हमें पूरी प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के साथ इसमें कोई दिक्कत नहीं हो रही। हमें विश्वास है कि यह पुनर्विकास न सिर्फ हमारी जिंदगी को बेहतर बनाएगा, बल्कि हमारे परिवार और व्यापार का भविष्य भी उज्जवल करेगा।’
स्थानीय निवासी विपाशा का कहना था कि 60 साल हो गए यहां रहते हुए, हमने बहुत कुछ सहा, लेकिन अब हमारे अच्छे दिन आ रहे हैं। पहले हमें लगा था कि कहीं और जाएंगे, लेकिन अधिकारियों ने समझाया और अब हम खुश हैं। झोपड़ी से बिल्डिंग में जाने का अवसर मिला है, यह हमारे लिए एक सपना सच होने जैसा है। अब हम चाहते हैं कि हमारे जैसे और लोग भी इस बदलाव का हिस्सा बने और अपने अच्छे दिन देख सकें।