पवनराजे निंबालकर हत्याकांड: 20 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपी बरी
Pawan Raje Nimbalkar murder Case: महाराष्ट्र के बहुचर्चित पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में 20 साल बाद अदालत का फैसला आ गया है। कोर्ट ने पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
- Written By: आकाश मसने
पद्मसिंह पाटिल व पवनराजे के बेटे ओम राजे निंबालकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pawan Raje Nimbalkar Murder Case Verdict: उद्धव ठाकरे गुट के बागी सांसद ओमराजे निंबालकर के पिता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर हत्याकांड के सभी आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। इस मामले में 20 साल बाद आज यानी 20 जून को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए पूर्व मंत्री और मुख्य आरोपी पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि इस मामले में केवल सरकारी गवाह की गवाही के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। सरकारी पक्ष के लिए यह गवाह एक महत्वपूर्ण कड़ी था, लेकिन बार-बार बयान बदलने के कारण उसकी गवाही को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
न्यायालय ने कहा कि सरकारी गवाह के बयानों में लगातार विरोधाभास पाए गए हैं, जिससे उसके बयान पर भरोसा करना संभव नहीं है। संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय सभी आरोपियों को बरी कर रहा है।
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पवनरोज निंबालकर हत्याकांड के आरोपियों के नाम
पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में CBI की चार्जशीट के अनुसार पद्मसिंह पाटिल, सतीश मांडाडे, मोहन शुक्ला, दिनेश तिवारी, परसमल जैन, कैलाश यादव, पिंटू सिंह, छोटू पांडे (शूटर के रूप में नाम) के साथ ही एक अन्य साजिशकर्ता प्रमुख आरोपियों में शामिल था।
कोर्ट ने कहा- सरकारी गवाह के बयान पर भरोसा करना संभव नहीं
फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाह यानी सरकारी गवाह के बयानों में लगातार विरोधाभास पाए गए, जिससे उनकी गवाही पर भरोसा करना संभव नहीं है। संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के गवाह ने नागपुर की यात्रा, शूटर पिंटू सिंह को काम पर रखने, पैसों के लेन-देन और हथियार खरीदने जैसी घटनाओं के बारे में अलग-अलग समय पर अलग-अलग बयान दिए थे। कोर्ट को उसके बयानों और उपलब्ध सबूतों में अंतर मिला, उसने दावा किया था कि वह राकेश मारिया से मिला था और उन्हें स्कॉच की एक बोतल दी थी, लेकिन मारिया ने इस दावे को नकार दिया।
जांच एजेंसियों पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। कोर्ट ने गौर किया कि मोबाइल फोन जब्त नहीं किए गए, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) हासिल नहीं किए गए और राकेश मारिया का बयान समय पर दर्ज नहीं किया गया। सरकारी गवाह की कस्टडी, कथित मारपीट और कबूलनामे की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गईं। कोर्ट ने पाया कि कबूलनामा दर्ज करने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक नहीं थी।
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2006 में हुई थी पवनराजे निंबालकर की हत्या
बता दें कि 3 जून 2006 को कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर अपने ड्राइवर समद काजी के साथ कार से मुंबई से उस्मानाबाद (जिसका नाम अब धाराशिव है) की ओर जा रहे थे। इसी दौरान नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में दो अज्ञात हमलावरों ने उनकी गाड़ी को जबरन रुकवाया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, शूटरों ने कार पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस भीषण हमले में पवनराजे निंबालकर और उनके चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।
