Panvel Municipal Corporation Election आरक्षण ड्रॉ में हंगामा, ओबीसी महिला सीटों पर बढ़ा विवाद
Panvel MNC के संशोधित आरक्षण ड्रॉ में राजनीतिक दलों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए। ओबीसी महिला सीटों को लेकर हंगामा बढ़ा, पुलिस तैनात करनी पड़ी और प्रक्रिया कुछ देर रोकनी पड़ी।
- Written By: अपूर्वा नायक
पनवेल मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Nikaay Chunaav: पनवेल मनपा के संशोधित आरक्षण ड्रॉ में जमकर हंगामा हुआ। अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के लिए ड्रॉ 11 नवंबर को निकाला गया था।
वहीं पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए 6 अतिरिक्त सीटों के लिए ड्रॉ निकालने के लिए मनपा आयुक्त मंगेश चितले की अध्यक्षता में शहर के वासुदेव बलवंत फड़के रंगमंच पर संशोधित ड्रॉ प्रक्रिया लागू की गई।
हालांकि, जब भाजपा पदाधिकारियों ने यह सवाल उठाया कि पिछली ड्रॉ प्रक्रिया में आखिर गलती किसने की थी, तो अन्य राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई।
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नए सिरे से ड्रा प्रक्रिया कराने की मांग : इस ड्रॉ में सुधार करने की बजाय, शेकाप, मनसे और कांग्रेस राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने डॉ प्रक्रिया को नए सिरे से कराने की मांग की। इस विरोध के कारण जैसे ही डॉ कार्यक्रम शुरू हुआ, थिएटर में पुलिस बल बुलाना पड़ा। अंततः इसी अफरा-तफरी के बीच, मनपा ने शेष 6 सीटों को पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित करने की घोषणा की।
असंतुष्ट पदाधिकारी हो गए आक्रामक
पनवेल शहर के वासुदेव बलवंत फड़के रंगमंच पर सुबह 11 बजे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयुक्त मंगेश चितले, अतिरिक्त आयुक्त गणेश शेटे और उपायुक्त नानासाहेब कामठे की देखरेख में लॉटरी प्रक्रिया शुरू हुई।
हालांकि, आरक्षण में बदलाव और ओबीसी महिलाओं के लिए सीटों के बंटवारे से असंतुष्ट विभिन्न दलों के पदाधिकारी आक्रामक हो गए। शेखा पार्टी के अरविंद म्हात्रे, प्रकाश म्हात्रे, गोपाल भगत, देवेंद्र माधवी, दीपक (बंटी) पाटिल, शंकर म्हात्रे, शिवसेना (ठाकरे गुट) के अवचित राउत, मनसे के योगेश चिले, कांग्रेस के सुदाम पाटिल, समाजवादी पार्टी के अनिल नाईक और ब्लैक पैंथर के जगदीश गायकवाड़ ने विरोध स्वरूप प्रदर्शन करते हुए मांग की कि आरक्षण फिर से लॉटरी के माध्यम से निकाला जाए।
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ड्रा प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होने का लगाया आरोप
- इस असमंजस की स्थिति के कारण लॉटरी प्रक्रिया कुछ देर के लिए रोकनी पड़ी, आयुक्त मंगेश चितले आक्रामक पदाधिकारियों को समझाने का प्रयास कर रहे थे।
- हालांकि, विवाद तब शुरू हुआ, जब भाजपा पदाधिकारी जयंत पगड़े ने अपना पक्ष रखते हुए डॉ पर सवाल उठाए सवाल पूछ रहे भाजपा नेता शांत हो गए।
- हालांकि, तब तक शेकाप, मनसे और कांग्रेस के पदाधिकारी सीधे आयुक्त की मेज के सामने बैठ गए और आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया की हॉ प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी।
- आयुका चितले के यह कहने के बाद भी कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और मतदाताओं को ड्रॉ के बाद आपत्तियां उठाने का अधिकार है। महाविकास आघाडी के पदाधिकारी शांत नहीं हुए।
- इसके बाद पुलिस बुलाई गई। महाविकास आधाड़ी के पदाधिकारियों ने पुलिस के सामने भी यही स्थिति रखी इस पूरे हंगामे के बीच, मनपा ने आक्रामक पदाधिकारियों को पडत करने और नियमानुसार स्पष्टीकरण देने की कोशिश की।
- राजनीतिक दलों के अपनी मांगों पर अड़े रहने के कारण इलाके में तनाव का माहौल बना रहा।
