शिंदे के ऑपरेशन टाइगर की निकलेगी हवा’, यू-टर्न का मन बना रहे हैं ओमराजे निंबालकर!
Omraje Nimbalkar U Turn Eknath Shinde Operation Tiger 2026: पवनराजे केस के फैसले से आहत ओमराजे निंबालकर बदल सकते हैं पाला; शिंदे गुट का दो-तिहाई का गणित खतरे में।
- Written By: अनिल सिंह
उद्धव ठाकरे, ओमरजे निंबालकर और एकनाथ शिंदे (फोटो क्रेडिट-X)
Omraje Nimbalkar U Turn: महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जरिए शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी सेंधमारी का दावा कर रहे एकनाथ शिंदे के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद, धराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर के बदले हुए सुरों ने महायुति गठबंधन की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अदालत के फैसले से बेहद आहत और निराश ओमराजे अब एक बड़ा यू-टर्न ले सकते हैं, जिससे शिंदे गुट का पूरा सियासी गणित पूरी तरह बिगड़ सकता है। इससे पहले यह माना जा रहा था कि ओमराजे निंबालकर अपने पिता के हत्यारों को सजा दिलवाने और अपने क्षेत्र के विकास फंड के लिए उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे खेमे की तरफ बढ़ रहे हैं।
ओमराजे ने खोले यू-टर्न के संकेत
विशेष अदालत से सभी आरोपियों के बरी होने के बाद ओमराजे निंबालकर ने खुलकर अपनी नाराजगी और दर्द व्यक्त किया है। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि वे इस अदालती फैसले के इंतजार में ही रुके हुए थे, और इसी वजह से उन्होंने दिल्ली में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई आपातकालीन बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ओमराजे ने एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने की खबरों पर ब्रेक लगाते हुए कहा, “मैंने अभी शिंदे गुट में जाने का कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र धराशिव की जनता और कार्यकर्ताओं से विस्तृत विमर्श करने के बाद ही अपना अगला राजनीतिक कदम उठाऊंगा।”
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‘ऑपरेशन टाइगर’ की निकल सकती है हवा, दो-तिहाई का आंकड़ा खतरे में
ओमराजे निंबालकर के इस संभावित यू-टर्न से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ की हवा निकलती दिखाई दे रही है। दरअसल, दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए शिंदे गुट को उद्धव सेना के कुल सांसदों में से कम से कम दो-तिहाई (2/3) सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। चर्चा थी कि उद्धव गुट के 6 सांसद बागी होने को तैयार हैं, लेकिन यदि ओमराजे निंबालकर आखिरी वक्त पर पीछे हट जाते हैं, तो बागी सांसदों की संख्या घटकर 5 रह जाएगी। यह संख्या कानूनी सुरक्षा के लिए जरूरी दो-तिहाई के जादुई आंकड़े से कम होगी।
बागी सांसदों पर मंडराया अयोग्यता का खतरा
यदि ओमराजे निंबालकर वापस उद्धव ठाकरे के साथ बने रहते हैं, तो कानूनी पेंच के कारण शिंदे गुट के साथ जाने का मन बना रहे अन्य 5 बागी सांसदों पर सीधे तौर पर अयोग्य घोषित होने का खतरा मंडराने लगेगा। इस स्थिति में उनका संसद सदस्य पद भी जा सकता है। इस नए राजनीतिक समीकरण के सामने आते ही शिवसेना (यूबीटी) खेमा एक बार फिर हमलावर हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि गद्दारी करने वालों का अंजाम ऐसा ही होता है और कानून के जाल में फंसकर शिंदे के इस तथाकथित ऑपरेशन का पूरी तरह फ्लॉप होना अब तय नजर आ रहा है।
