अधिकारी अब मार खाएंगे… महाराष्ट्र विधानसभा के सत्र में अपनी ही सरकार पर क्यों भड़के निलेश राणे?
MSEDCL Smart Meter Controversy: महाराष्ट्र विधानसभा सत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सत्तापक्ष के विधायक नीलेश राणे स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर भड़क गए।
- Written By: गोरक्ष पोफली
निलेश राणे का बयान (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Nilesh Rane Angry On Officers Over Smart Meter: महाराष्ट्र विधानसभा के हालिया सत्र में उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई जब सत्ताधारी गठबंधन के ही विधायक निलेश राणे ने स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर अपनी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कुडाल से विधायक राणे ने अत्यंत कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त भारी असंतोष को सदन के पटल पर रखा।
सदन में चर्चा के दौरान निलेश राणे ने सीधे तौर पर कहा कि स्मार्ट मीटर को लेकर अधिकारी कभी न कभी मार खाएंगे, अब हर जिले में ऐसी स्थिति आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई सामान्य समस्या नहीं है, बल्कि अधिकारी जनता के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं। राणे के अनुसार, अधिकारी मरम्मत के नाम पर लोगों के घरों पर जाते हैं और ग्राहक की अनुमति लिए बिना ही वहां चुपके से स्मार्ट मीटर फिट कर देते हैं।
मंत्री के आंकड़ाे को बताया गलत
निलेश राणे ने मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों को भी चुनौती दी। राणे ने कहा कि यह दावा करना गलत है कि केवल 4% शिकायतें मिली हैं, वास्तविकता यह है कि 50% से अधिक लोग इन मीटरों से परेशान हैं। उन्होंने अधिकारियों पर मंत्रालय को गुमराह करने और गलत ब्रीफिंग देने का आरोप लगाया। राणे ने ग्रामीण इलाकों की स्थिति बयां करते हुए कहा कि अगर आप वहां गाड़ी लेकर भी जाएंगे, तो लोग स्मार्ट मीटर की शिकायत करने के लिए सड़क पर उतर आएंगे।
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🟠 पावसाळी अधिवेशन – २०२६
📍 विधानभवन, मुंबई
आज सभागृहात ऊर्जा विभागाच्या लक्षवेधी सूचनेद्वारे कुडाळ मालवणचे आमदार माननीय निलेशजी राणे साहेब यांनी मतदारसंघासह ग्रामीण भागात जबरदस्तीने बसविण्यात येत असलेल्या स्मार्ट मीटरच्या मुद्द्यावर जनतेच्या भावना आणि समस्या ठामपणे मांडल्या. pic.twitter.com/TdBDsKhfFS — Office of Nilesh Rane (@AaplaNileshRane) July 3, 2026
मंत्री मेघना बोर्डिकर का बचाव: यह केवल गलतफहमी है
निलेश राणे के तीखे हमलों का जवाब देते हुए मंत्री मेघना बोर्डिकर ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर के कारण बिल बढ़ना एक गलतफहमी है। मंत्री ने डेटा पेश करते हुए बताया कि राज्य में अब तक 1 करोड़ 23 लाख लोगों ने मीटर लगवाए हैं, जिनमें से केवल 3.92 लाख शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायतों के निवारण के लिए अधिकारी मौके पर जाकर ‘चेक मीटर’ लगाते हैं और तकनीकी खराबी की जांच कर ग्राहकों का समाधान करते हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि ये मीटर स्वैच्छिक और पोस्टपेड हैं, न कि अनिवार्य।
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नाना पटोले का प्रहार: जनता की आर्थिक लूट
इस चर्चा में कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी हस्तक्षेप किया और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। पटोले ने आरोप लगाया कि किसी बड़ी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है और ठेकेदार के लोग ही ये मीटर लगा रहे हैं, जबकि सरकारी अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं। उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल चार गुना तक बढ़ गए हैं, जिससे आम आदमी का आर्थिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
पटोले ने मुख्यमंत्री के पुराने बयान का हवाला देते हुए पूछा कि जब इसे ऐच्छिक बताया गया था, तो अब किसके दबाव में इसे अनिवार्य किया जा रहा है? उन्होंने इसे जनता की आर्थिक लूट और महंगाई के दौर में एक इलेक्ट्रिक शॉक करार दिया। यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि स्मार्ट मीटर को लेकर ग्रामीण महाराष्ट्र में असंतोष की आग सुलग रही है, जिसने अब सत्ता पक्ष के भीतर भी मतभेद पैदा कर दिए हैं।
