पार्थ पवार जाएंगे राज्यसभा, सुनेत्रा संभालेंगी मुंबई; अजित दादा की विरासत पर महायुति का 'कब्जा' तय!

Parth Pawar Rajya Sabha: सुनेत्रा पवार के बाद अब पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने की तैयारी। शरद पवार का 12 फरवरी का 'मर्जर प्लान' अधर में। बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक।
BJP & NCP (Ajit) play a masterstroke to stop NCP merger. Sunetra Pawar becomes Dy CM, while Parth Pawar is set for Rajya Sabha. Sharad Pawar's Feb 12 plan on hold.
पार्थ पवार और सुनेत्रा पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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NCP Merger News: एनसीपी (शरद पवार) और एनसीपी (अजित पवार) के विलय की संभावनाओं के बीच बीजेपी ने मास्टर स्ट्रोक खेला है। दिवंगत अजित पवार के उत्तराधिकारी के तौर पर सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री का पदभार सौंपने के बाद रिक्त हुई राज्य सभा की सीट पर पार्थ पवार को भेजने की तैयारी की गई है।

सुनेत्रा पवार ने राज्य सभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। इस रिक्त सीट पर अजित पवार के पुत्र पार्थ पवार को भेजने की पार्टी में कोशिशें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस बारे में भी एनसीपी (अजित पवार) के सांसद प्रफुल्ल पटेल और प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने चर्चा की है। सुनेत्रा पवार को बतौर उपमुख्यमंत्री महायुति की पॉलिटिकल लाइन पर चलना होगा।

दोनों पार्टियों के बीच में हुई बातचीत

चर्चा है कि सुनेत्रा पवार की खाली राज्यसभा सीट पर भाजपा को मौका दे सकती है। इसलिए अजित पवार परिवार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के महायुति के साथ बने रहने की संभावना है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इससे दोनों एनसीपी के विलय होने की संभावनाओं पर विराम लग सकता है। पिछले कई दिनों से दोनों एनसीपी के साथ आने की चर्चा है।

एनसीपी (एसपी) के मुखिया शरद पवार ने अब दोनों दलों के विलय पर अनिश्चितता दर्शाई है। शरद पवार ने शनिवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए साफ किया कि दोनों दलों के बारे में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार और हमारे दल के नेता जयंत पाटिल के बीच सकारात्मक बातचीत हुई थी। इस बारे में 12 फरवरी को अधिकृत घोषणा होने थी। दोनों दलों के बीच अच्छी बातचीत हुई थी।

चल रही थी दोनों दलों के साथ आने की चर्चा

  • शरद पवार ने कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बारे में उनसे कोई बातचीत नहीं हुई है।
  • यह अजित पवार की पार्टी का अंदरूनी मामला है। दोनों दलों के साथ आने की चर्चाएं चल रही थी। वह इस चर्चा में शामिल नहीं थे।
  • अजित दादा चाहते थे कि दोनों दल एक साथ आएं और हम भी यही चाहते थे, उन्होंने साफ किया कि अब इस पर फैसला दोनों तरफ के नेता लेंगे।
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