NCP Sunetra Pawar News: राकांपा ने शनिवार को पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष और दरार की अटकलों को पूरी तरह से खारिज किया। पार्टी ने कहा कि राकांपा प्रमुख अजीत पवार के निधन के बाद निर्वाचन आयोग के साथ शीर्ष नेताओं के संवाद को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
राकांपा ने उन आरोपों का भी खंडन किया, जिनमें वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे पर पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया था। साथ ही उन अटकलों को भी निराधार बताया गया कि वर्तमान पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार दोनों नेताओं से नाराज हैं।
राकांपा प्रवक्ता सूरज चौहान ने बताया कि अजीत पवार के समय में भी प्रफुल पटेल के पास कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पार्टी उम्मीदवारों को एबी फॉर्म आवंटित करने का अधिकार था। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और राकांपा प्रमुख अजीत पवार की 28 जनवरी को बारामती में विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी।
उनके निधन के बाद सुनेत्रा पवार को 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई और 26 फरवरी को उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष चुना गया। पटेल और तटकरे द्वारा 16 फरवरी को निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र के अनुसार, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यकारी अध्यक्ष को महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार है।
इसके बाद सुनेत्रा पवार ने 10 मार्च को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अपने निर्वाचन और कार्यसमिति की नियुक्ति की जानकारी दी और स्पष्ट किया कि पूर्व में भेजा गया पत्र अमान्य माना जाए। कलह की अटकलें जानबूझकर फैलाई।
राकांपा प्रवक्ता ने कहा कि अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद कार्यकारी अध्यक्ष के पास मौजूद शक्तियां स्वतः समाप्त हो जाती हैं। इसलिए, पार्टी में सत्ता संघर्ष और आंतरिक कलह की अटकलें जानबूझकर फैलाई गई हैं, जो पूरी तरह निराधार और झूठी हैं।
निर्वाचन आयोग को लिखे गए चार पन्नों के पत्र में सुनेत्रा पवार ने बिना पदनाम के सुनील तटकरे और प्रफुल पटेल का उल्लेख किया, जिससे संगठन में उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर अटकलें तेज हुईं। महाराष्ट्र में राकांपा, भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ सत्ता में साझीदार है।