सुनेत्रा का मास्टर स्ट्रोक: राकांपा में जिम्मेदारी का बंटवारा, पार्थ को मुंबई-दिल्ली, जय संभालेंगे पुणे

Sunetra Pawar: राकां (अजीत पवार गुट) में संगठनात्मक जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार और जय पवार की भूमिकाओं पर चर्चा तेज हुई, हालांकि पार्टी ने इन खबरों को भ्रामक बताया है।
ncp ajit pawar faction organization reshuffle sunetra parth jay pawar bararmati politics
Sunetra Parth Jay Pawar (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

NCP Ajit Pawar Faction Reshuffle: राकांपा (अजीत पवार) पार्टी के भीतर एक बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। बारामती उपचुनाव के लिए मतदान संपन्न होते ही पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भविष्य की रणनीति स्पष्ट कर दी है। अजीत पवार के निधन के बाद पार्टी की पकड़ मजबूत बनाए रखने और परिवार के वर्चस्व को सुरक्षित करने के उद्देश्य से सुनेत्रा पवार ने जिम्मेदारियों का तीन चरणों में बंटवारा किया है। इस रणनीतिक फैसले को आगामी राजनीति के लिहाज से एक 'मास्टर स्ट्रोक' माना जा रहा है।

नए कार्य विभाजन के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार स्वयं राज्यभर का दौरा कर संगठन को मजबूती देने का काम करेंगी। वहीं, उनके बड़े पुत्र और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार को दिल्ली की राजनीति के साथ-साथ मुंबई में पार्टी संगठन को संभालने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी ओर, छोटे पुत्र जय पवार को उनके घरेलू मैदान बारामती और पुणे ग्रामीण विभाग की कमान दी गई है। माना जा रहा है कि पार्टी पर अपनी पकड़ बनाए रखने और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए सुनेत्रा पवार ने सभी मुख्य सूत्र अपने परिवार के हाथों में ही रखे हैं।

2029 की चुनावी बिसात और पवार बनाम पवार

इस बीच, बारामती उपचुनाव के मतदान के दौरान जय पवार के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जय ने कहा कि कार्यकर्ता और जनता चाहती है कि वे 2029 के विधानसभा चुनाव में बारामती से उम्मीदवार बनें। इस पर पलटवार करते हुए रोहित पवार ने संकेत दिया कि 2029 में एक बार फिर 'पवार बनाम पवार' की जंग देखने को मिल सकती है, जिसमें एक तरफ जय पवार तो दूसरी तरफ से युगेंद्र पवार मैदान में हो सकते हैं।

विपक्ष के आरोपों और भविष्य की चुनौती

अजीत दादा पवार के जाने के बाद पार्टी के भीतर कुछ नेताओं द्वारा सत्ता की बागडोर अपने हाथ में लेने की कोशिशों के आरोप लगते रहे हैं। चर्चा है कि सुनेत्रा पवार को किनारे करने की कोशिशों के बीच उन्होंने अपने दोनों बेटों को सक्रिय राजनीति के मोर्चे पर तैनात कर दिया है। पार्थ पवार पहले से ही राज्यसभा में सक्रिय हैं, जबकि जय पवार ने अब चुनावी राजनीति में अपनी महत्वाकांक्षा स्पष्ट कर दी है। ऐसे में यह नया कार्य विभाजन पार्टी के भविष्य को सुरक्षित करने की एक बड़ी कवायद मानी जा रही है।

राकां ने बताया खबरों को भ्रामक

दूसरी ओर अजीत की राकांपा ने उपरोक्त खबरों को भ्रामक बताया है। पार्टी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पार्टी के कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी अप्रमाणित और शरारतपूर्ण खबर पर विश्वास न करें। पार्टी ने स्पष्ट किया कहा है कि संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर फैलाया जा रहा यह प्रचार सत्य से परे है। इस पर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजीत पवार के बाद पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए परिवार के भीतर सक्रियता तो बढ़ी है, लेकिन फिलहाल पार्टी सामूहिक नेतृत्व के जरिए ही आगे बढ़ने का संदेश दे रही है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com