मुंबई के मछुआरे (सौ. सोशल मीडिया )
Navi Mumbai Fisherman Diesel Price Hike: मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से पहले से ही बढ़े हुए खर्चों के बीच, अब डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने मछुआरों पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है।
देश भर में मछली पकड़ने वाली संस्थाओं को सप्लाई किए जाने वाले डीजल की कीमत में लगभग 23 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे हर डीप-सी ट्रिप पर लगभग 42,000 रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।
युद्ध की वजह से मछली पकड़ने के जाल, लेड और दूसरे सामान की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं, अब डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से मछुआरों पर आर्थिक संकट और अधिक बढ़ गया है। एक नाव को एक ट्रिप के लिए लगभग 2 से 3 हजार लीटर डीजल की जरूरत होती है। बढ़ी हुई कीमतों की वजह से, प्रति लीटर कीमत, जो पहले लगभग 90 रुपये थी, अब 114 रुपये तक पहुंच गई है।
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कंज्यूमर कैटेगरी में लागू होने से मछली पकड़ने वाली संस्थाओं पर भी असर पड़ा है। रेलवे, बेस्ट, टाटा, रिलायंस और एयरलाइंस जैसे बड़े कंज्यूमर के साथ-साथ मछुआरों की संस्थाओं पर भी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ा है।
इन कंज्यूमर ऑर्गनाइजेशन में देश के सभी मछुआरों के ऑर्गनाइजेशन भी शामिल हैं। इसलिए, डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी देश भर के मछुआरों के ऑर्गनाइजेशन के लिए लागू की गई है, ऐसा राज्य की सबसे बड़ी करंजा फिशर मैन कोऑपरेटिव सोसायटी के अध्यक्ष प्रदीप नाखवा का कहना है। बढ़ते डीजल एवं अन्य खचों के चलते मछुआरों की हालत खराब होती जा रही है।
प्रदीप नखवा ने मांग की है कि मछुआरों की संस्था को तुरंत इस कैटेगरी से बाहर किया जाए। उन्होंने तब तक डीजल खरीदने से बचने की अपील की है और उन्होंने कहा कि कई संस्थाओं ने तेल कंपनियों के टैंकर वापस भेज दिए हैं।
ये भी पढ़ें :- प्रयागराज-कानपुर रूट पर ‘कवच’ सिस्टम लागू, ट्रेनें अब 160 किमी/घंटा रफ्तार से दौड़ेंगी
जहां सामान महंगा हो गया है, वहीं डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से हालात और खराब हो गए हैं। वेस्ट कोस्ट पर्सन नेट फिशिंग एसोसिएशन के सेक्रेटरी रमेश नखवा ने कहा, अगर हालात ऐसे ही रहे, तो मछली पकड़ने का बिजनेस ठप होने की संभावना है।