नवी मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर 138 करोड़ का अखरोट आयात घोटाला उजागर; मास्टरमाइंड समेत 5 गिरफ्तार

Nhava Sheva Custom Fraud: नवी मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट पर सीमा शुल्क विभाग ने 'ऑपरेशन को-फाइंड' के तहत एक बड़े तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने सरकार को ₹138.84 करोड़ का चूना लगाया।
Nhava Sheva Port Walnut Import Scam
न्हावा शेवा बंदरगाह पर 138 करोड़ का अखरोट आयात घोटाला (सोर्स: AI)
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Nhava Sheva Port Walnut Import Scam: जवाहरलाल नेहरू कस्टम हाउस (JNCH) की केंद्रीय खुफिया इकाई ने एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह चीन और अमेरिका से आने वाले अखरोट को अफगानिस्तान का बताकर भारत में आयात कर रहा था, ताकि भारी टैक्स चोरी की जा सके। इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी सहित पांच लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित न्हावा शेवा बंदरगाह पर अखरोट के फर्जी आयात के जरिए सीमा शुल्क की चोरी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इस धोखाधड़ी के कारण सरकार को 138.84 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार विशेष सूचना के आधार पर न्हावा शेवा में 'जवाहरलाल नेहरू कस्टम हाउस' (JNCH) की केंद्रीय खुफिया इकाई (CIU) ने 'ऑपरेशन को-फाइंड' चलाया, जिसने इस बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया।

फर्जी दस्तावेजों से 110% टैक्स को किया सिर्फ 5%

अधिकारियों ने बताया कि चीन, अमेरिका और चिली से आने वाली अखरोट की खेपों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जेबेल अली के रास्ते भेजा जा रहा था। दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) के तहत गलत तरीके से तरजीही शुल्क (प्रिफरेंशियल टैरिफ) लाभ का दावा करने के लिए इन खेपों को झूठे तौर पर अफगानिस्तान का दिखाया गया था। एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह अखरोट पर लगने वाले प्रभावी सीमा शुल्क को लगभग 110 प्रतिशत से घटाकर मात्र 5 प्रतिशत कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि तस्करों ने जाली पारगमन रिकॉर्ड तैयार करने और मूल देश के झूठे दावों को साबित करने के लिए बंदर अब्बास (ईरान) से जेबेल अली (यूएई) तक आवाजाही दर्शाने वाले माल लादने के फर्जी बिल तैयार किए थे।

छापेमारी में डिजिटल और दस्तावेजी सबूत बरामद

सीआईयू के अधिकारी ने कहा कि मुंबई में कई स्थानों पर समन्वित छापेमारी में भारी मात्रा में डिजिटल और दस्तावेजी सबूत बरामद हुए हैं, जिसके बाद अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी ने बताया कि 12 जून को सीआईयू अधिकारियों ने सूरत के व्यवसायी दीपकभाई काकड़िया के बेटे स्नेह दीपकभाई काकड़िया को गिरफ्तार किया। एजेंसियों का आरोप है कि वह इस गिरोह का सरगना है, जो आर्थिक लाभ के लिए फर्जी आयातकों के माध्यम से माल के वित्तपोषण, खरीद, सीमा शुल्क निकासी और बिक्री को नियंत्रित कर रहा था। उसे 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

कैसे हुआ घाेटाले का खुलासा?

जेएनसीएच में अखरोट के देशवार आयात रुझान के विश्लेषण से पता चला कि जांच की अवधि के दौरान अफगानिस्तान की घोषणाओं में असामान्य उछाल आया, जिसके बाद इसमें अचानक गिरावट देखी गई। यह रिकॉर्ड सामान्य व्यावसायिक उतार-चढ़ाव से मेल नहीं खाता था और इससे देश के मूल संबंधी फर्जी दावों के आरोप पुख्ता हुए।

अधिकारी ने बताया कि इस धोखाधड़ी के कारण कम कीमत पर आयातित अखरोट बाजार में उतारे गए, जिससे बाजार की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। इसका नुकसान ईमानदार कारोबारियों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के घरेलू अखरोट उत्पादकों को भी उठाना पड़ा। साथ ही, सरकार के राजस्व को भी भारी क्षति पहुंची।

उन्होंने बताया कि इसी मामले से जुड़े एक घटनाक्रम में, मुंबई उच्च न्यायालय ने हाल में दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए अफगानिस्तान से आए होने का दावा किए गए जब्त माल की खेपों को बिना शर्त छोड़ने के आदेश देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने सीमा शुल्क विभाग को निकासी से पहले राजस्व सुरक्षित करने का अधिकार देते हुए केवल 2.78 करोड़ रुपये के पूर्ण अंतर शुल्क को जमा करने या उसी राशि की बैंक गारंटी देने पर ही जब्त माल को सशर्त छोड़ने की अनुमति दी। अधिकारी ने कहा कि इस गिरोह से जुड़े सभी लाभार्थियों, मददगारों, वित्तीय संबंधों और खेपों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।

(एजेंसी इनपुट के  साथ)

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