खारघर की पहाड़ियों में पत्थर खनन पर बढ़ा खतरा, टाटा मेमोरियल सेंटर के कैंसर मरीजों पर खतरे की घंटी
Navi Mumbai के खारघर में पत्थर खनन व विस्फोटों से टाटा मेमोरियल सेंटर के कैंसर मरीजों की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है। धूल और कंपन से अस्पताल की इमारतों में दरारें आ रही हैं, NGT ने जांच समिति गठित की।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
खारघर की पहाड़ियों में पत्थर खनन (सोर्सः सोशल मीडिया)
Kharghar Hills Mining Threat To Cancer Hospital: नवी मुंबई के खारघर स्थित पहाड़ियों में चल रही पत्थर खनन और विस्फोट गतिविधियों ने अब देश के प्रमुख कैंसर उपचार व शोध संस्थान टाटा मेमोरियल सेंटर के एडवांस्ड सेंटर फॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर की चिंता बढ़ा दी है। संस्थान ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को बताया है कि खनन से उड़ने वाली धूल और विस्फोटों से पैदा हो रहे कंपन कैंसर मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे की घंटी बन रहे हैं।
इसके चलते अस्पताल की इमारतों में दरारें पड़ने और प्रोटॉन थेरेपी सहित संवेदनशील चिकित्सा व शोध उपकरणों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इन सबके बीच बीच एनजीटी ने संयुक्त जांच समिति गठित कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
पुणे स्थित एनजीटी की पश्चिमी क्षेत्रीय पीठ के समक्ष पर्यावरण संगठन नेटकनेक्ट फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका के जवाब में एक्ट्रेक ने विस्तृत हलफनामा पेश किया है। हलफनामे में कहा गया है कि खनन गतिविधियों से उत्पन्न धूल का स्तर कई बार निर्धारित मानकों से अधिक पाया गया है, जिससे अस्पताल में उपचाररत मरीजों, विशेषकर कीमोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट करा रहे रोगियों के लिए गंभीर श्वसन संबंधी खतरा उत्पन्न हो रहा है।
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एक्ट्रेक के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी विंग कमांडर पी. जे. मोंटेइरो (सेवानिवृत्त) द्वारा हस्ताक्षरित हलफनामे के अनुसार खदानों से उड़ने वाली धूल मरीजों और कर्मचारियों दोनों के लिए लगातार चिंता का विषय बन गई है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले कैंसर रोगी वायुजनित प्रदूषकों और पर्यावरणीय व्यवधानों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
इमारतों में दरारें, उपकरणों पर खतरा
एक्ट्रेक ने एनजीटी को बताया कि 2 जुलाई 2025 की संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट में अस्पताल इमारतों को हुए नुकसान की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार खनन क्षेत्र में होने वाले विस्फोटों से पैदा कंपन के कारण बीम, स्लैब और अन्य कंक्रीट संरचनाओं में दरारें आई हैं।
संस्थान ने चेतावनी दी है कि प्रोटॉन बीम थेरेपी सिस्टम, रेडियोथेरेपी एक्सीलरेटर और अन्य संवेदनशील शोध उपकरण भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे उपचार की सटीकता पर असर पड़ने की आशंका है।
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चार सदस्यीय समिति गठित
मामले की जांच के लिए एनजीटी ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय, भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधियों की चार सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है। समिति अवैध खनन, एक्ट्रेक को हुए नुकसान, मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल के बुनियादी ढांचे पर प्रभाव का आकलन करेगी। एनजीटी ने एक माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
