प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Navi Mumbai CIDCO Plot Fraud: महाराष्ट्र के शहर एवं औद्योगिक विकास महामंडल (CIDCO) की जमीनों पर भू-माफियाओं की नजर किस कदर गड़ी है, इसका ताजा उदाहरण नवी मुंबई के कोपरखैरान क्षेत्र में देखने को मिला है। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसने सार्वजनिक सेवाओं और उपयोगिताओं के लिए आरक्षित एक सरकारी भूखंड को जाली दस्तावेजों के सहारे न केवल बेचा, बल्कि उस पर अवैध निर्माण भी करवा दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, कोपरखैरान इलाके में एक कीमती भूखंड CIDCO द्वारा सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित रखा गया था। इस जमीन का इस्तेमाल भविष्य में स्कूल, अस्पताल या गार्डन जैसी सुविधाओं के लिए होना था। हालांकि, जालसाजों ने इस जमीन को हड़पने के लिए एक बड़ी साजिश रची। आरोपियों ने CIDCO के असली दस्तावेजों जैसे दिखने वाले फर्जी कागजात तैयार किए और भोले-भाले खरीदारों को यह यकीन दिलाया कि यह जमीन बिक्री के लिए उपलब्ध है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब विभाग को इस भूखंड पर हो रहे अवैध निर्माण और संदिग्ध लेनदेन की शिकायत मिली। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस ने गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्य और दस्तावेजों के मिलान से पता चला कि नेरुल गांव निवासी प्रभाकर आत्माराम म्हात्रे (59) ने इस पूरे फर्जीवाड़े में मुख्य भूमिका निभाई थी।
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म्हात्रे पर आरोप है कि उसने फर्जी स्टाम्प, जाली हस्ताक्षर और हेरफेर किए गए दस्तावेजों की मदद से इस आरक्षित भूखंड की अवैध बिक्री में सहायता की। पुलिस ने बुधवार को जाल बिछाकर म्हात्रे को हिरासत में ले लिया।
नवी मुंबई पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इस घोटाले में CIDCO के कुछ निचले स्तर के अधिकारियों या कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि म्हात्रे ने अब तक और कितनी सरकारी संपत्तियों को इसी तरह चूना लगाया है। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और कोर्ट ने उसे आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर भेज दिया है। इस कार्रवाई से नवी मुंबई के भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।