बेलापुर कोर्ट का बड़ा आदेश, 42 हजार की रिश्वत मामले में Navi Mumbai मनपा अधिकारी रिमांड पर
Navi Mumbai ACB Bribery Case News: मनपा अधिकारी डॉ. कैलाश गायकवाड को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। बेलापुर कोर्ट ने उन्हें पुलिस कस्टडी में भेजा है, मामले में बड़े वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
नवी मुंबई एसीबी रिश्वत केस (सौ. सोशल मीडिया )
Navi Mumbai ACB Bribery Case: बेलापुर सेशंस कोर्ट ने नवी मुंबई मनपा के अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त डॉ। कैलाश गायकवाड को रिमांड पर रखने का आदेश जारी किया है। गायकवाड़ को कॉन्ट्रैक्टर से रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था।
उन्हें बेलापुर सेशंस कोर्ट ने 24 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। एंटी-करप्शन ब्यूरो ने उन्हें बुधवार दोपहर करीब 2।30 बजे कोर्ट में पेश किया। सरकारी पक्ष ने उनकी कस्टडी मांगी थी, यह कहते हुए कि मामले में फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का पता लगाना, संबंधित डॉक्यूमेंट्स की जांच करना और दूसरे संभावित संबंधित लोगों की तलाश करना जरूरी है।
एसीबी ने रात भर ली गायकवाड के घर की तलाशी
डॉ गायकवाड़ को मंगलवार के दिन मनपा मुख्यालय में अपने ऑफिस में एक कॉन्ट्रैक्टर से 42,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। उन पर आरोप है कि उन्होंने ऐरोली विभाग में अतिक्रमण विरोधी अभियान के लिए गाड़ियां देने वाले कॉन्ट्रैक्टर से करीब 21 लाख रुपये के पेंडिंग बिल को मंजूरी देने और चेक पर साइन करने के लिए यह रकम मांगी थी। एसीबी ने कॉन्ट्रैक्टर की शिकायत वेरिफाई करने के बाद यह कार्रवाई की। बताया गया कि गिरफ्तारी के बाद एसीबी टीम ने गायकवाड़ के घर पर रात भर तलाशी ली।
सम्बंधित ख़बरें
Mira Bhayandar में प्री-मानसून तैयारी तेज, मैंग्रोव क्षेत्रों में नाला सफाई पर बनी रणनीति
Thane Belapur Industrial Zone MIDC में ट्रक टर्मिनल की तैयारी, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
Nerul Flamingo Lake पर प्रदूषण का खतरा, जांच में जहरीले पानी का खुलासा
Panvel Pod Taxi Project को मिली रफ्तार, ट्रैफिक और प्रदूषण से राहत की उम्मीद
ये भी पढ़ें :- Mira Bhayandar में प्री-मानसून तैयारी तेज, मैंग्रोव क्षेत्रों में नाला सफाई पर बनी रणनीति
जांच के दौरान घर से मिले दो आलीशान फ्लैट के दस्तावेज
बताया जाता है कि तलाशी के दौरान गायकवाड और उनकी पत्नी के नाम पर एक-एक आलीशान फ्लैट के कागजात मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रॉपर्टी के सोर्स, इसके फाइनेंशियल लेन-देन और इनकम से इसके कनेक्शन की जांच चल रही है। इस बीच, जानकारी मिली है कि अतिक्रमण विभाग से जुड़े करीब 1।5 करोड़ रुपये के बिल पेंडिंग हैं। यह पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि बिल मंजूरी प्रोसेस में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई और रिश्वत की मांग सिस्टमेटिक तरीके से दूसरे मामलों से तो नहीं जुड़ी है। पुलिस कस्टडी के दौरान इन सभी मामलों की पूरी जाच की जाएगी।
