Narhari Zirwal Viral Video Case Update (डिजाइन फोटो)
Narhari Zirwal Viral Video Case Update: महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल लाने वाले एक कथित ‘आपत्तिजनक वीडियो’ के वायरल होने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल की कुर्सी अब खतरे में दिखाई दे रही है। बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को मंत्रालय में आयोजित राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक से झिरवाल की अनुपस्थिति ने उनके इस्तीफे की अटकलों को और तेज कर दिया है। इससे पहले उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अध्यक्षता में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कोटे के मंत्रियों की एक ‘प्री-कैबिनेट’ बैठक हुई, जिसमें झिरवाल मामले पर गंभीर चर्चा की गई। दिलचस्प बात यह है कि झिरवाल न तो पार्टी की आंतरिक बैठक में पहुंचे और न ही मुख्य कैबिनेट बैठक में, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या उनका ‘विकेट’ गिरना तय है?
वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने झिरवाल के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना दिया है। सत्ता पक्ष के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद उभर कर सामने आए हैं, जिसका असर कैबिनेट की कार्यवाही पर भी पड़ा और बैठक को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा।
कैबिनेट बैठक से ठीक पहले उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने एनसीपी मंत्रियों के साथ एक आपातकालीन बैठक की। इस बैठक में छगन भुजबल, अदिति तटकरे, दत्तामामा भरने और हसन मुश्रीफ जैसे दिग्गज नेता उपस्थित थे, लेकिन नरहरी झिरवाल के साथ-साथ सतारा मामले से नाराज मकरंद पाटिल भी नदारद रहे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में मुख्य रूप से झिरवाल के वायरल वीडियो से पार्टी की छवि को हो रहे नुकसान पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व इस बात पर बंटा हुआ है कि क्या झिरवाल से तुरंत इस्तीफा मांगा जाए या जांच पूरी होने तक उन्हें मौका दिया जाए। मकरंद पाटिल और झिरवाल की संयुक्त अनुपस्थिति ने सरकार के भीतर बढ़ती दरार को भी उजागर कर दिया है।
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इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब पवन यादव नामक व्यक्ति के भाई के खिलाफ मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। शिकायतकर्ता पवन यादव (जो खुद को ट्रांसजेंडर बताते हैं) ने आरोप लगाया है कि उनके भाई ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर उन्हें एफडीए (FDA) विभाग में नौकरी नहीं दिलवाई गई, तो वे मंत्री झिरवाल के साथ वाला वीडियो वायरल कर देंगे। पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो को जानबूझकर ‘एडिट’ किया गया है ताकि मंत्री की छवि खराब की जा सके। वीडियो में कथित तौर पर शराब और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई देने का दावा किया गया था, जिसे अब बचाव पक्ष साजिश बता रहा है।
भले ही बचाव पक्ष इसे साजिश बता रहा हो, लेकिन राजनीतिक नुकसान की भरपाई करना सुनेत्रा पवार और महायुति सरकार के लिए आसान नहीं होगा। झिरवाल की कैबिनेट बैठक से दूरी यह संकेत देती है कि उन्हें पार्टी की ओर से ‘लो-प्रोफाइल’ रहने या विचार करने के निर्देश दिए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि एक कैबिनेट मंत्री का नाम ऐसे विवादों में आना अनैतिक है और उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, क्या नरहरी झिरवाल अपना पद बचा पाएंगे या उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा?