MVA में ‘2028’ का मास्टरस्ट्रोक: अंबादास दानवे की उम्मीदवारी के बदले कांग्रेस ने पक्की की अपनी दो सीटें
Shiv Sena UBT Congress Agreement: अंबादास दानवे की उम्मीदवारी पर MVA में समझौता। कांग्रेस को 2028 में मिलेंगी 2 सीटें। राज्यसभा और MLC चुनाव के लिए बनी रणनीति।
- Written By: अनिल सिंह
राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे (फोटो क्रेडिट-X)
Shiv Sena UBT Congress Deal For 2028: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के लिए अंबादास दानवे की उम्मीदवारी ने महाविकास आघाडी में जो संकट पैदा किया था, वह अब एक दूरगामी समझौते के साथ सुलझता नजर आ रहा है। शुरुआत में जब शिवसेना (UBT) ने सहयोगियों से परामर्श किए बिना दानवे के नाम की घोषणा की, तो कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपना प्रत्याशी उतारने की धमकी दी थी। हालांकि, दोनों दलों के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत में कांग्रेस ने वर्तमान की एक सीट छोड़ने के बदले वर्ष 2028 के लिए एक बड़ी राजनीतिक डील सफलतापूर्वक हासिल कर ली है।
इस समझौते के अनुसार, 2028 में विधान परिषद की 10 सीटों, मुंबई स्थानीय निकाय की दो सीटों और राज्यसभा के चुनावों में कांग्रेस की हिस्सेदारी बढ़ेगी। कांग्रेस ने विशेष रूप से राज्यसभा की एक और विधान परिषद की एक अतिरिक्त सीट की मांग की थी, जिसे उद्धव ठाकरे ने स्वीकार कर लिया है। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस समझौते की सफलता की जानकारी दिल्ली स्थित आलाकमान को भी साझा कर दी है।
कांग्रेस की ‘हैट्रिक’ और कार्यकर्ताओं का दबाव
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि कांग्रेस ने पिछले एक महीने में तीसरी बार कदम पीछे खींचे हैं। राज्यसभा चुनाव, बारामती विधानसभा उपचुनाव और अब विधान परिषद चुनाव से नाम वापस लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। हालांकि, 16 विधायकों वाली पार्टी होने के बावजूद वर्तमान में कोई सीट न मिलने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई, जिसे भविष्य के लाभ के तर्क से शांत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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2028 की डील का गणित
समझौते की शर्तों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) आगामी वर्षों में अपनी सीटों के कोटे से कांग्रेस को प्रतिनिधित्व देने पर सहमत हुई है। इस डील का मुख्य केंद्र 2028 में खाली होने वाली सीटें हैं, जहाँ कांग्रेस को दो सीटों की गारंटी दी गई है। यह कदम दर्शाता है कि एमवीए के भीतर गठबंधन को बरकरार रखने के लिए वर्तमान नुकसान को भविष्य के निवेश के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष को एकजुट रखने की कोशिश
उद्धव ठाकरे द्वारा कांग्रेस की मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद अब अंबादास दानवे की जीत का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस समझौते ने न केवल तात्कालिक राजनीतिक संकट को टाला है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भी एक साझा मंच तैयार किया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या यह ‘2028 का फॉर्मूला’ महाविकास आघाडी के अन्य दलों के बीच भी इसी तरह के तालमेल का आधार बनेगा।
