

Healthcare Government Hospital: महानगर की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। कांदिवली स्थित भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर शताब्दी अस्पताल में मरीजों की भीड़ और सुविधाओं की कमी को लेकर कांग्रेस की पूर्व नगर सेविका शीतल अशोक म्हात्रे ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनके अनुसार, अस्पताल के कुछ वार्डों में मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि कई मरीजों को एक ही बेड साझा करना पड़ रहा है। उन्होंने वार्ड और गलियारों में भी मरीजों के मौजूद होने तथा कर्मचारियों की कमी का भी दावा किया है।
म्हात्रे ने बुधवार को शताब्दी अस्पताल का दौरा किया और वहां भर्ती मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल के वरिष्ठ कर्मचारियों से भी स्थिति को लेकर बातचीत की। म्हात्रे ने अस्पताल में मरीजों की संख्या, उपलब्ध सुविधाओं और कर्मचारियों की स्थिति को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है। हालांकि, एक बेड पर कई मरीजों के उपचार और कर्मचारियों की कमी से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
BMC के 2026-27 के बजट में स्वास्थ्य विभाग के लिए ₹5,237.09 करोड़ राजस्व मद और ₹2,219.71 करोड़ पूंजीगत मद में रखे गए हैं। दोनों मदों को मिलाकर स्वास्थ्य विभाग के लिए कुल ₹7,456.80 करोड़ का प्रावधान है। ऐसे में म्युनिसिपल अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं, मरीजों की क्षमता और कर्मचारियों की उपलब्धता से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
इसी बीच बोरीवली का श्री हरिलाल भगवती अस्पताल भी चर्चा में है। अस्पताल की नई 490 बिस्तरों वाली इमारत का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन अस्पताल पूरी तरह शुरू नहीं हो सका है। जून 2026 में बृहन्मुंबई नगर निगम आयुक्त ने अस्पताल का निरीक्षण कर इसे जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे।
भगवती अस्पताल के पूरी तरह शुरू होने से पश्चिमी उपनगरों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ सकती है। फिलहाल शताब्दी अस्पताल जैसे मौजूदा अस्पतालों में मरीजों की संख्या, कर्मचारियों की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। इसके साथ ही तैयार अस्पताल भवनों को जल्द उपयोग में लाने से सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।