

Water-Borne Diseases in Bhandara: भंडारा जिले में दूषित पेयजल और जल-जनित बीमारियों का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी से जुलाई के बीच जिले के विभिन्न जल स्रोतों से लिए गए कुल 5,472 पेयजल नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की गई, जिनमें से 93 नमूने (1.70 प्रतिशत) पीने के लिए पूरी तरह असुरक्षित और अयोग्य पाए गए हैं। दूषित पाए गए जल स्रोतों का तत्काल शुद्धीकरण कर संबंधित ग्राम पंचायतों को सख्त कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
रोग निगरानी कार्यक्रम (एपिडेमिक सरवैलेंस प्रोग्राम) की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अगस्त की अवधि में जिले भर में जल-जनित बीमारियों के कुल 3,859 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 3,161 मरीज गंभीर दस्त (डायरिया) के शिकार हुए हैं। इसके अलावा, पेचिश (डायरैक्ट डायरिया/डिसेंट्री) के 440 और टाइफाइड के 258 मरीज सामने आए हैं। इस दौरान जिले की पवनी तहसील के वलनी और लाखनी तहसील के केसलवाड़ा-वाघ गांव में जल-जनित बीमारियों के बड़े प्रकोप (आउटब्रेक) की घटनाएं भी सामने आईं।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई से स्थिति पर काबू पा लिया गया और राहत की बात यह रही कि किसी भी मरीज की जान नहीं गई। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, पानी के दूषित होने का एक प्रमुख कारण पेयजल शोधन में इस्तेमाल होने वाले ब्लीचिंग पाउडर (टीसीएल) की खराब गुणवत्ता है। पाउडर में क्लोरीन की मात्रा पर्याप्त न होने से पानी सही से कीटाणुरहित नहीं हो पाता।
विभाग अब संदिग्ध टीसीएल पाउडर की प्रयोगशाला में नियमित जांच करा रहा है। जिन सैंपलों में क्लोरीन का स्तर 20 प्रतिशत से कम पाया जा रहा है, उन्हें घटिया मानकर तुरंत नष्ट करने के आदेश दिए गए हैं। फिलहाल, जिले के 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण इलाकों पर पैनी नजर रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग का महामारी नियंत्रण कक्ष 1 जून से लगातार सक्रिय होकर काम कर रहा है।
भंडारा जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नितिन कापसे ने कहा कि दूषित पानी और जल जनित बीमारियों के नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दूषित पाए गए जल स्रोतों का टीसीएल पाउडर से नियमित शुद्धिकरण करने और घटिया पाउडर को नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिक पानी उबालकर और ठंडा करके ही पीएं तथा बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।