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BMC के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में रोजाना सप्लाई होने वाले लगभग 4,100 MLD पानी का करीब 34% हिस्सा लीकेज और चोरी के कारण बर्बाद हो जाता है।
BMC जमीन के नीचे पाइपलाइनों में होने वाले रिसाव की सही जगह पहचानने के लिए सोनार तकनीक अपनाने की योजना बना रही है।
मुंबई के करीब 6,000 किलोमीटर लंबे पाइपलाइन नेटवर्क में पुरानी पाइपलाइनों को बदलने की रफ्तार बढ़ाई जाएगी।
BMC Water Supply: मुंबई में पानी की कटौती झेल रहे लोगों के राह आसान नहीं है। एक तरफ बारिश की कमी के कारण पानी बचाकर इस्तेमाल करने की नौबत आ गई है, तो दूसरी तरफ शहर में सप्लाई होने वाला लाखों लीटर पानी पाइपलाइनों की खराबी और चोरी के कारण लोगों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो रहा है। अब इस नुकसान पर लगाम लगाने के लिए बीएमसी ने अपनी तैयारी तेज कर दी है।
प्रशासन पुरानी पाइपलाइन को तेजी से बदलने के साथ ही जमीन के नीचे पानी कहां से रिस रहा है, इसका पता लगाने के लिए सोनार तकनीक अपनाने की योजना ने बना रहा है। बीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में रोजाना करीब 4,100 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है। इसमें से लगभग 1,394 मिलियन लीटर पानी यानी करीब 34 फीसदी हिस्सा लीकेज और चोरी के कारण बर्बाद हो जाता है। यह नुकसान ऐसे समय में हो रहा है, जब शहर की रोजाना जरूरत करीब 4,600 एमएलडी है और पानी की कमी के चलते 10 फीसदी कटौती लागू करनी पड़ी है।
लीकेज का पता लगाना बीएमसी के लिए बड़ी चुनौती है। कई बार सड़क पर पानी बहता दिखाई देता है, लेकिन जमीन खोदने पर पता चलता है कि पाइपलाइन में छेद उस जगह नहीं, बल्कि कहीं और है। सही जगह तलाशने के लिए बार-बार खुदाई करनी पड़ती है। इससे सड़कों को नुकसान पहुंचता है और मरम्मत में भी देरी होती है।
बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त (परियोजनाएं) अभिजीत बांगर के मुताबिक, सोनार तकनीक की मदद से जमीन के नीचे होने वाले रिसाव की जगह का पता लगाने में मदद मिलेगी। इससे अनावश्यक खुदाई कम करने और पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिल सकती है। मुंबई में पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइनों का जाल करीब 6,000 किलोमीटर लंबा है। इनमें से कई पाइपलाइन काफी पुरानी हो चुकी है। फिलहाल सालभर में केवल 60 से 70 किलोमीटर पाइपलाइन बदली जाती है।
बीएमसी अब इसे बढ़ाकर 250 से 300 किलोमीटर सालाना करने की तैयारी में है। इससे अगले चार वर्षों में पुराने नेटवर्क के करीब 25 से 30 फीसदी हिस्से को बदलने का लक्ष्य है। इसके अलावा झुग्गी बस्तियों में अवैध कनेक्शन रोकने के लिए वैध पानी कनेक्शन देने की योजना का भी विस्तार किया जाएगा। वर्ष 2021 में शुरू हुई 'सभी के लिए पानी' योजना के तहत अब तक 29,110 कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जबकि 35,697 आवेदन मिले हैं।