Mumbai University में स्टाफ का चरणबद्ध आंदोलन, 20 नवंबर से होगा तेज
Mumbai University के शिक्षकों ने सीएएस देरी, रिक्त पदों और प्रवेश–परीक्षा अव्यवस्था के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया है। 20 नवंबर से आंदोलन और 24 नवंबर से धरना प्रस्तावित है।
- Written By: अपूर्वा नायक
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Mumbai News In Hindi: मुंबई अकादमिक स्टाफ संघ ने सोमवार से चरणबद्ध तरीके से आंदोलन की घोषणा की है। संघ ने लंबे समय से लंबित मुद्दों, रिक्त पदों, प्रवेश और परीक्षा प्रक्रियाओं के बीच समन्वय की कमी तथा अन्य सेवा-संबंधी समस्याओं को इस आंदोलन का कारण बताया है।
संघ ने अपनी मांगों पर त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए कुलपति को सात सूत्री पत्र सौंपा है। आंदोलन के पहले चरण में शिक्षक तीन दिनों तक काले रिबन पहनकर काम पर रिपोर्ट करेंगे, जो प्रतीकात्मक विरोध होगा।
इसके बाद 20 नवंबर से सदस्यों का आंदोलन और 24 नवंबर से ” धरना” शुरू होगा। सेवा-संबंधी प्रमुख मुद्दों में से एक है करियर एडवांसमेंट स्कीम के कार्यान्वयन में देरी। संघ के अध्यक्ष बालाजी केंद्रे ने कहा, “अनुदानित और गैर-अनुदानित दोनों प्रकार के कई कर्मचारी एक वर्ष से अधिक समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।
सम्बंधित ख़बरें
जबरन शादी से बचने के लिए छोड़ा था घर; अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला के हक में सुनाया यह बड़ा फैसला
अस्पतालों की सुध लेने अचानक पहुंचे अधिकारी; मुंबई के चेंबूर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दिए कड़े आदेश
NMC की सख्ती: 70 मेडिकल कॉलेजों को नोटिस, CCTV और निगरानी प्रणाली तुरंत करना होगा अनिवार्य
स्वतंत्रता दिवस तक नहीं सीख पाए मराठी तो सीधे लाइसेंस कैंसल, प्रताप सरनाइक ने दी ऑटो-टैक्सी चालकों को चेतावनी
इस देरी का प्रभाव सिर्फ शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि छात्रों पर भी पड़ता है, क्योंकि इससे पीएचडी गाइडों की स्वीकृत संख्या कम हो जाती है। पीएचडी गाइड की तलाश कर रहे छात्रों की प्रतीक्षा सूची काफी लंबी है। एक अन्य बड़ा मुद्दा विदेशी शैक्षणिक यात्रा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने में देरी है।
केंद्रे के अनुसार, कई शिक्षक समय पर स्वीकृति न मिलने के कारण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यूजीसी ने भी कहा है कि प्राध्यापकों को ऐसे आयोजनों में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए, ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों में भागीदारी से विश्वविद्यालय की प्रोफाइल मजबूत होती है, विशेषकर एनआईआरएफ और क्यूएस जैसी रैंकिंग में, जहां विश्वविद्यालय की कम रैंक हमेशा चिंता का विषय रही है।
ये भी पढ़ें :- अवैध होर्डिंग पर Bombay High Court सख्त, महाराष्ट्र के निकायों से पूरी रिपोर्ट तलब
कुलपति को लिखे पत्र
मानविकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वाणिज्य आदि चार प्रमुख संकायों में पूर्णकालिक डीन न होने के मुद्दे के साथ ही संघ ने कुलपति डॉ। रविंद्र कुलकर्णी को लिखे पत्र में प्रवेश और परीक्षा प्रक्रियाओं के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर किया है। संघ के अनुसार, प्रवेश में लंबी देरी का असर शैक्षणिक कैलेंडर पर पड़ता है, जिससे परीक्षाएं और परिणाम घोषणाएं भी देरी से होती हैं। केंद्रे ने कहा, “इन प्रक्रियागत समस्याओं के कारण कई छात्र मुंबई यूनिवर्सिटी से दूर हो रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
