समंदर के पानी को साफ करेगी BMC, मुंबईकरों को गंदे पानी और बदबू से मिलेगी मुक्ति, जानें पूरा प्लान
Mumbai Sea Pollution: मुंबई के समुद्र को प्रदूषण और बदबू से बचाने के लिए BMC ने घाटकोपर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ा दी है, जिससे समुद्री पानी साफ और सुरक्षित होगा।
- Written By: आकाश मसने
घाटकोपर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (सोर्स: एक्स@mybmc)
BMC Ghatkopar STP Project: मुंबई के समुद्र तट मुंबई में पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। लेकिन मुंबई में लगातार बढ़ती आबादी के कारण समुद्र में मिलने वाले नालों के गंदे पानी की मात्रा भी बढ़ रही है, जिसकी वजह से समुद्र के पानी में बदबू की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, इसी के साथ साथ समुद्र का पानी त्वचा के लिए नुकसानदेह बनता जा रहा है। बीएमसी ने इसे गंभीरता से लिया है। अब समुद्र को साफ करने का बीड़ा उठा लिया है।
मुंबई में समुद्र में छोड़े जाने वाले अपशिष्ट जल की गुणवत्ता सुधारने और समुद्री पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की दिशा में बीएमसी ने घाटकोपर स्थित महत्वाकांक्षी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजना की गति तेज करने का निर्णय लिया है।
अतिरिक्त मनपा आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने घाटकोपर (पूर्व) स्थित 337 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले एसटीपी और घाटकोपर पंपिंग स्टेशन उन्नयन परियोजना का निरीक्षण कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर, बल्कि बेहतर योजना के साथ तय समय से पहले पूरा करने का प्रयास किया जाए। उन्होंने कार्यस्थल पर अतिरिक्त मैनपावर तैनात कर निर्माण कार्य में तेजी लाने पर जोर दिया।
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नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान अभिजीत बांगर ने कहा कि फिलहाल मुंबई में बारिश का असर कम होने से निर्माण कार्य के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। ऐसे में इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए परियोजना के विभिन्न चरणों के कार्य समानांतर रूप से किए जाएं, ताकि 31 मार्च 2027 तक एसटीपी का निर्माण पूरा किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाकर कार्य करने और प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
🔹समुद्राच्या पाण्याची गुणवत्ता सुधारण्यासाठी बृहन्मुंबई महानगरपालिकेच्या महत्त्वाकांक्षी मलनि:सारण प्रकल्पांतर्गत घाटकोपर (पूर्व) येथे मलजल प्रक्रिया केंद्र (STP) उभारणी तसेच घाटकोपर उदंचन केंद्राच्या (Pumping Station) दर्जोन्नतीची कामे वेगाने प्रगतिपथावर आहेत. या प्रकल्पामध्ये… pic.twitter.com/dHuqGgfOAh — माझी Mumbai, आपली BMC (@mybmc) July 11, 2026
घाटकोपर पंपिंग स्टेशन पर चल रहे सिविल और विद्युत कार्यों की समीक्षा करते हुए बांगर ने बताया कि यहां भवन की मरम्मत, पुराने उपकरणों का प्रतिस्थापन, राइजिंग मेन पाइपलाइन बिछाने तथा अधिक क्षमता वाले पंप लगाने का कार्य तेजी से जारी है। इस परियोजना का लगभग 85 प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मल-निस्सारण व्यवस्था की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस पंपिंग स्टेशन का कार्य दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए।
घनी आबादी वाले क्षेत्रों को होगा बड़ा फायदा
बीएमसी के अनुसार, नया एसटीपी शुरू होने के बाद समुद्र में छोड़े जाने वाले पानी की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे समुद्री जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा। इसके साथ ही घाटकोपर, मानखुर्द, गोवंडी और चेंबूर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को भी इस परियोजना का प्रत्यक्ष लाभमिलेगा।
वर्तमान में घाटकोपर के मौजूदा संयंत्र में सीवेज का केवल प्राथमिक स्तर पर स्क्रीनिंग और डिग्रिटिंग कर उसे खाड़ी में छोड़ा जाता है, जबकि नए संयंत्र में प्रतिदिन 337 मिलियन लीटर सीवेज का द्वितीयक उपचार और उसमें से 170 मिलियन लीटर सीवेज का तृतयक उपचार कि या जाएगा। बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना का निर्माण कार्य जुलाई 2022 में शुरू हुआ था। डिजाइन और निर्माण की अवधि चार वर्ष तथा संचालन एवं रखरखाव की अवधि 15 वर्ष निर्धारित की गई है।
गुणवत्ता पहले की तुलना में होगी बेहतर
परियोजना में आधुनिक सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (SBR) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उपचारित जल की गुणवत्ता पहले की तुलना में काफी बेहतर होगी। निरीक्षण के दौरान उप आयुक्त (अभियांत्रिकी) शशांक भोरे, प्रभारी प्रमुख अभियंता अशोक मेंगडे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना क्षेत्र ठाणे खाड़ी फ्लेमिंगो अभयारण्य सहित इको-सेंसिटिव क्षेत्र से घिरा होने के कारण निर्माण कार्य पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए किया जा रहा है।
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मालाड, भांडुप और घाटकोपर में कुल सात एसटीपी परियोजनाएं विकसित की जा रही है। इनमें भांडुप परियोजना का कार्य सबसे अधिक 78.20 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके बाद धारावी 67.61 प्रतिशत, वर्सोवा 64.84 प्रतिशत, बांद्रा 60.42 प्रतिशत, घाटकोपर 59 प्रतिशत और वरली 56.30 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इन परियोजनाओं में एमबीआर (मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर), एसबीआर (सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर) तथा कॉन्स्टेंट फ्लो जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
