मौसम की मार के बीच मुंबई पुलिस बनी भगवान, जान को खतरे में डाल बस में फंसे बच्चों को बाहर निकाला
Mumbai News: भारी बारिश ने मुंबई के हालात बिगाड़ दिए हैं, लेकिन फिर भी मुंबई पुलिस बहादुरी से अपना काम कर रही है। मुंबई पुलिस ने स्कूल बसों में फंसे बच्चों की जान बचाकर मानवता की मिसाल दी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई पुलिस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Mumbai News: मूसलाधार बारिश और बाढ़ के बीच मुंबई पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह न केवल कानून की रक्षक है। बल्कि संकट में फंसे लोगों के लिए सच्चा सहारा भी है। माटुंगा पुलिस ने पुलिस उपायुक्त (जोन-4) रागसुधा आर के कुशल नेतृत्व में ऐसा कारनामा किया, जिसने उन्हें ‘मानव देवदूत’ का खिताब दिलाया।
अपनी जान जोखिम में डालकर, भीगते हुए और सीने तक पानी में उत्तरकर पुलिस ने स्कूल बसों में फंसे छोटे बच्चों और छात्राओं को न केवल सुरक्षित निकाला, बल्कि उनके डर को प्यार और हौसले से दूर कर उनके परिवारों तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया है। पिछले तीन दिनों से मुंबई में हो रही भारी बारिश ने शहर को जलमग्न कर दिया था। माटुंगा के किंग सर्कल और गांधी मार्केट इलाके में पानी का स्तर 4-5 फीट तक पहुंच गया, जिससे यातायात ठप हो गया। इसी दौरान डॉन बॉस्को स्कूल की एक बस 4 फीट गहरे पानी में फंस गई।
पानी में एक घंटे से फंसी थी बस
बस में 6 छोटे बच्चे, एक ड्राइवर और एक महिला कर्मधारी सवार थे। बस एक घंटे से अधिक समय से फंसी थी और बच्चे डर के मारे मदद का इंतजार कर रहे थे। बच्चों के अभिभावकों को सूचित कर दिया गया था, लेकिन हालात गंभीर थे। सूचना मिलते ही पुलिस उपायुक्त रागसुधा आर ने त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया। सहायक पुलिस आयुक्त सचिन कदम और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेंद्र पवार 10 पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे।
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बच्चों के चेहरों पर लाए मुस्कान
सीने तक भरे पानी में बहते जल के बीच, पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस दिखाया और सभी 6 बच्चों, ड्राइवर व कर्मचारी को सुरक्षित निकालकर माटुंगा पुलिस स्टेशन पहुंचाया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उसी इलाके में एक और स्कूल बस फंस गई, जिसमें 44 छात्राएं थीं। इस बार माटुंगा पुलिस ने सायन पुलिस के साथ मिलकर तत्परता दिखाई और सभी छात्राओं को सुरक्षित निकाला। पुलिसकर्मियों ने ममता भरे अंदाज में उनसे बात कर उनके डर को दूर किया। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए पुलिस ने उन्हें प्यार से सहारा दिया। जब तक कि उनके माता-पिता उन्हें सुरक्षित घर ले जाने नहीं पहुंचे।
