मुंबई पुलिस के 3 ‘सुपरकॉप्स’ अचानक भेजे गए शहर से बाहर, विधानसभा चुनावों में इन राज्यों में संभालेंगे मोर्चा
Mumbai Police News: मुंबई पुलिस के तीन दिग्गज जॉइंट कमिश्नर्स को अचानक चुनाव ड्यूटी पर दूसरे राज्यों में तैनात किया गया है। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने यह बड़ा कदम उठाया है।
- Written By: आकाश मसने
लक्ष्मी गौतम, जय कुमार और डॉ. आरती सिंह (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai Police Election Duty: मुंबई पुलिस के गलियारों में हलचल तेज है। शहर की सुरक्षा और क्राइम की कमान संभालने वाले तीन सबसे कद्दावर अधिकारी जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) लक्ष्मी गौतम, जॉइंट कमिश्नर (एडमिनिस्ट्रेशन) जय कुमार और जॉइंट कमिश्नर (इंटेलिजेंस) डॉ. आरती सिंह अचानक मुंबई से रवाना हो गए हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने इन्हें संवेदनशील राज्यों की कमान सौंपी है।
किसे कहां मिली जिम्मेदारी?
मुंबई क्राइम ब्रांच के चीफ लक्ष्मी गौतम को असम की जिम्मेदारी दी गई है। वह 18 मार्च से 9 अप्रैल तक वहां रहकर चुनावी व्यवस्थाओं पर नजर रखेंगे। वहीं, जय कुमार को पश्चिम बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य में तैनात किया गया है। चूंकि पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में (18-25 मार्च और 30 मार्च-24 अप्रैल) होने हैं, इसलिए जय कुमार पूरे समय वहां मोर्चा संभालेंगे।
इंटेलिजेंस विंग की कमान संभालने वाली डॉ. आरती सिंह को केरल भेजा गया है। वह 18 मार्च से 9 अप्रैल तक केरल में रहकर सुरक्षा इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण करेंगी।
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दूसरे राज्यों के पुलिस वालों का होना जरूरी
इलेक्शन के दौरान अलग-अलग राज्यों से पुलिसवालों को ड्यूटी पर लगाने का एक लंबा ट्रेडिशन है। इस प्रैक्टिस के पीछे दो मेन वजहें हैं, पहला कारण यह है कि चुनाव के दौरान और पुलिस फोर्स की जरूरत होती है, इसलिए दूसरे राज्यों से पुलिस ऑफिसर और कांस्टेबल बुलाकर और मैनपावर की जरूरत पूरी की जाती है। दूसरा कारण यह है कि जिस राज्य में चुनाव हो रहे है, वहां निष्पक्ष चुनाव हो इसके लिए दूसरे राज्यों के पुलिस वालों का होना जरूरी माना जाता है।
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कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट देंगे
लोकल नेताओं के लिए अक्सर अपने राज्य के बाहर के पुलिस वालों पर दबाव डालना या गलत असर डालना मुश्किल होता है। मुंबई से तीन जॉइंट पुलिस कमिश्नर, जिन्हें चुनाव ड्यूटी के लिए भेजा गया है, समय-समय पर चुनाव आयोग को कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट देंगे। इन रिपोर्ट के आधार पर, चुनाव आयोग, अगर जरूरी हो, तो चुनावी मीटिंग और पोलिंग के दिन ज्यादा असरदार सुरक्षा इंतजाम पथका करने के लिए और पुलिस फोर्स बुला सकता है।
