

Mumbai Education Night Schools: मुंबई में आर्थिक रूप से कमजोर और कामकाजी विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण विकल्प रही नाइट स्कूलों की संख्या एक दशक में करीब 350 से घटकर 120 रह गई है।
सरकारी अनुदान में कमी, शिक्षकों की कमी और बढ़ते ड्रॉपआउट को स्कूलों की खराब स्थिति की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
कभी मुंबई के उन बच्चों के लिए नाइट स्कूल उम्मीद की किरण थीं, जिन्हें परिवार की आर्थिक मजबूरियों के कारण दिन में काम करना पड़ता था। काम के बाद रात में पढ़ाई पूरी करने का मौका देने वाली इन स्कूलों की संख्या अब तेजी से घट रही है। एक दशक पहले मुंबई में करीब 350 नाइट स्कूल थीं, जो अब सिमटकर 120 के आसपास रह गई हैं।
मुंबई में नाइट स्कूलों की शुरुआत ऐसे विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प के तौर पर हुई थी, जिन्हें आर्थिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई के साथ काम करना पड़ता था। दिन में रोजगार या परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के बाद ये विद्यार्थी रात में स्कूल जाकर अपनी शिक्षा जारी रखते थे।
कई नाइट स्कूलों में विद्यार्थियों को शिक्षा सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती थी। लेकिन समय के साथ सुविधाओं में कमी और शिक्षकों की समस्या बढ़ती गई। इसका सीधा असर इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब एक दशक पहले मुंबई में 350 के आसपास नाइट स्कूल संचालित होती थीं। अब इनकी संख्या घटकर करीब 120 रह गई है। कई रिपोर्टों में सरकारी अनुदान नहीं मिलने को स्कूलों के बंद होने की प्रमुख वजह बताया गया है।
मुंबई शहर और उपनगरों में बड़ी संख्या में नाइट स्कूल बीएमसी स्कूलों की इमारतों में संचालित होती हैं। दक्षिण मुंबई में चलने वाली 18 नाइट स्कूलों में भी कई के सामने अस्तित्व का संकट बताया जा रहा है।
हाल ही में सिद्धार्थ नाइट स्कूल के तीन शिक्षकों के तबादले का मामला भी सामने आया। शिक्षकों की कमी के बीच विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है।
नाइट स्कूलों के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में सरकारी फंड की कमी, शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों का बढ़ता ड्रॉपआउट शामिल है। कम विद्यार्थियों वाली कक्षाओं को बंद किए जाने की नीति भी कुछ स्कूलों के लिए चुनौती बन रही है।
बीएमसी की उपायुक्त (शिक्षा) प्राची जांभेकर के मुताबिक, प्रशासन नाइट स्कूलों को बचाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने शिक्षकों की कमी और बढ़ते ड्रॉपआउट को चिंता का विषय बताया। उनके अनुसार, फंड में कमी के कारण प्राइवेट ट्रस्ट और एनजीओ की मदद से स्कूलों को चलाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुंबई शहर में अब भी कई नाइट स्कूल विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर दे रही हैं। इनमें सेंट जेवियर्स नाइट हाई स्कूल और सिद्धार्थ नाइट हाई स्कूल (फोर्ट), रेजिना पैसिस नाइट हाई स्कूल (भायखला), भारतीय विद्या मंदिर नाइट हाई स्कूल (माटुंगा पश्चिम), मॉडल नाइट हाई स्कूल (डोंगरी) और पंचशील नाइट हाई स्कूल (मालवणी) शामिल हैं।
नाइट स्कूलों की घटती संख्या का सबसे बड़ा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ सकता है, जिनके लिए दिन में काम और रात में पढ़ाई ही शिक्षा जारी रखने का रास्ता है। ऐसे में इन स्कूलों को संसाधन और शिक्षक उपलब्ध कराना शिक्षा के साथ सामाजिक अवसरों से भी जुड़ा मुद्दा बन गया है।