

Nagpur Justice Y. G. Khobragade: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने कलमना पुलिस स्टेशन में दर्ज हत्या के मामले में आरोपी की जमानत रद्द करने की महाराष्ट्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति वाई. जी. खोबरागड़े ने मामले की सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ नए गैर-संज्ञेय मामले दर्ज होना अपने आप में जमानत की शर्तों के उल्लंघन या गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
यह मामला हत्या के आरोपी उत्तम उर्फ बाबा सपन सेनापति से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आरोपी को हाई कोर्ट ने इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को कुछ नियम और शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ने आपराधिक आवेदन दायर कर आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग की।
अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी के खिलाफ चार से पांच गैर-संज्ञेय अपराध दर्ज हुए हैं। राज्य सरकार का कहना था कि इससे पता चलता है कि आरोपी ने जमानत आदेश की शर्तों का उल्लंघन किया है। अभियोजन ने अदालत से मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक आरोपी को दोबारा हिरासत में लेने का अनुरोध किया।
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खण्ड पीठ मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जमानत रद्द करने के लिए प्रस्तुत आधारों पर विचार किया। न्यायमूर्ति वाई. जी. खोबरागड़े ने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत के बाद आरोपी के खिलाफ नए गैर-संज्ञेय मामले दर्ज होना मात्र यह साबित नहीं करता कि उसने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।
अदालत ने यह भी माना कि केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी ने गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया। इसके लिए जमानत की शर्तों के उल्लंघन या गवाहों को प्रभावित करने से जुड़े ठोस आधार आवश्यक हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में आरोपी की ओर से उसके वकील ने राज्य सरकार की याचिका का विरोध किया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ दर्ज शिकायतें झूठी हैं और उसे गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर जमानत रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। इस आदेश के साथ आरोपी की पहले दी गई जमानत बरकरार रही।