

Mumbai Mayor Ritu Tawde Court Fine Assault Case: दस साल पुराने मारपीट के मामले में लगातार अदालत में पेश नहीं होने पर मुंबई की महापौर रितू तावड़े पर अदालत ने 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी. जी. भंसाली ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई में भी अनुपस्थित रहने पर उनके खिलाफ वारंट जारी किया जा सकता है। साथ ही, उनका जमानत बंधपत्र रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह मामला वर्ष 2016 की एक कथित मारपीट की घटना से जुड़ा है। घटना के बाद वर्ष 2017 में आरोपपत्र दाखिल किया गया था, लेकिन अब तक आरोप तय नहीं हो सके हैं। अदालत ने आरोपियों की लगातार गैरहाजिरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की अनुपस्थिति से मुकदमे की सुनवाई लंबी खिंच रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछली सुनवाई के दौरान भी महापौर पर 300 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके बावजूद लगातार अदालत में पेश नहीं होने के कारण इस बार 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
महापौर रितू तावड़े की ओर से अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने की मांग की गई। उनके वकील ने दलील दी कि मुंबई की प्रथम नागरिक होने के नाते उन्हें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के विभिन्न कार्यक्रमों और आधिकारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहना पड़ता है।
हालांकि, अदालत ने लगातार गैरहाजिरी पर सख्त रुख अपनाया और अगली सुनवाई में उपस्थित रहने की चेतावनी दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आगे भी अनुपस्थिति रहने पर वारंट जारी करने और जमानत बंधपत्र रद्द करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के कई साल बाद भी आरोप तय नहीं होने पर सुनवाई की प्रक्रिया में देरी का मुद्दा सामने आया है।
अदालत की चेतावनी के बाद अगली सुनवाई में महापौर रितू तावड़े की उपस्थिति और मामले की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। मामले में आरोप तय होने और सुनवाई आगे बढ़ने के बाद ही इसकी कानूनी प्रक्रिया की अगली स्थिति स्पष्ट होगी।