

Mumbai Sachin Waze Bail Plea NIA: बर्खास्त सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वझे की जमानत याचिका का राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कड़ा विरोध किया है। एजेंसी ने आशंका जताई है कि यदि वझे को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।
अपनी दलील के समर्थन में एनआईए ने ख्वाजा यूनुस मामले का भी उल्लेख किया। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने एजेंसी से सवाल किया कि जब वझे पर कड़ी शर्तें लगाने का विकल्प मौजूद है, तो उनकी जमानत का विरोध क्यों किया जा रहा है।
सचिन वझे की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने एजेंसी का पक्ष रखा। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए वझे की रिहाई का विरोध करने के पीछे एजेंसी की चिंताओं पर सवाल उठाए।
एनआईए ने दलील दी कि वझे को जमानत पर रिहा करना समाज के लिए खतरा पैदा कर सकता है। एजेंसी के मुताबिक, वझे के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और उनकी रिहाई से जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। इसी संदर्भ में एजेंसी ने ख्वाजा यूनुस मामले का उदाहरण देते हुए सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका पर जोर दिया।
सुनवाई के दौरान अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि वझे ने कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से आतंक से जुड़े घटनाक्रम को अंजाम दिया था। एनआईए ने यह भी दावा किया कि मामले में साजिश का खुलासा रोकने के उद्देश्य से वझे ने अन्य लोगों की मदद से अपने सहयोगी मनसुख हिरेन की हत्या करवाई।
एजेंसी की ओर से अदालत में रखे गए ये आरोप मामले की गंभीरता को रेखांकित करने के लिए पेश किए गए। हालांकि, आरोपों को अदालत में साबित किया जाना आवश्यक है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत इन दलीलों और उपलब्ध कानूनी तथ्यों पर विचार करेगी।
एनआईए ने सुनवाई के दौरान पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा का भी जिक्र किया। एजेंसी के अनुसार, सचिन वझे ने शर्मा को पुलिस मुख्यालय बुलाया था और उन्हें नकदी से भरा एक बैग दिया था। एनआईए ने आरोप लगाया कि इसके बाद शर्मा ने कथित साजिश में वझे की मदद की।
फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट में सचिन वझे की जमानत याचिका पर सुनवाई जारी है। एनआईए की ओर से उनकी रिहाई का विरोध करते हुए सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका और मामले से जुड़े अन्य आरोपों को आधार बनाया गया है। अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें और मामले के कानूनी पहलू महत्वपूर्ण होंगे।