Mumbai Mayor Ritu Tawde Social Media Controversy: मुंबई की महापौर रितू तावड़े लगातार सुर्खियों में हैं। महापौर की सोशल मीडिया टीम के लिए 25 लाख सालाना खर्च को लेकर विपक्ष ने रितू तावड़े का जमकर घेराव किया जिसके बाद बीजेपी की किरकिरी बढ़ गई। बीजेपी पार्टी की छवि खराब होते हुए देख सोमवार शाम को मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने महापौर सहित बीजेपी नगरसेवकों की बैठक बुलाई। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवाडकर और महापौर रितू तावड़े के बीच किसी विषय को लेकर विवाद हो गया।
इसके बाद अमीत साटम ने मामला सुलझाने की कोशिश की और कहा कि नगरसेवकों को मुंबई के हित के लिए काम करना है। उन्होंने सभी बीजेपी नगरसेवकों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है। बता दें कि, महापौर रितू तावड़े का विवाद सोशल मीडिया टीम को लेकर हुआ जहां उनकी मांग थी कि सोशल मीडिया टीम में महापौर के विजिट को लेकर लगातार ऑनलाइन विडियो व फोटो अपलोड किया जाए लेकिन स्थायी समिति में आए इस प्रस्ताव का विपक्ष ने विरोध किया और कहा कि जब जनसंपर्क विभाग महापौर के लिए काम कर रहा है तो अतिरिक्त टीम क्यों चाहिए।
इस घटना के बाद विवाद शुरू हुआ और इसके बाद बीजेपी नगरसेवकों में गुटबाजी बढ़ने की जानकारी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, कुछ नगरसेवक शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवाडकर का साथ दे रहे है। वही कुछ महापौर का। महापौर का कार्यकाल लगातार विवादों में घिरा रहा है। महंगी धड़ी से लेकर 4 करोड़ बंगले पर खर्च किए जाने समेत अन्य मुद्दों को लेकर लगातार रितू तावड़े ट्रोल होती नजर आ रही हैं, इससे बीजेपी के वरिष्ठ नेता नाराज हैं।
नियम के मुताबिक, महापौर का कार्यकाल का ढाई वर्ष का होता है लेकिन बीजेपी का सूत्रों का कहना है कि अगर महापौर का रवैया नहीं बदला और वह लगातार विवादों में घिरी रहती है तो इनका कार्यकाल 15 महीने तक रह सकता है, उसके बाद किसी नए नगरसेवक को महापौर बनाया जा सकता है।
बीएमसी में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से भाजपा ने अपने नगरसेवकों के कामकाज का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का फैसला किया है। बाहरी एजेंसी के माध्यम से होने वाले ऑडिट के आधार पर प्रत्येक नगरसेवक का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। ऑडिट में नगरसेवकों को मिलने वाले विकास फंड के आवंटन और खर्च की विस्तृत जांच होगी। धन किन कार्यों पर खर्च हुआ और उससे स्थानीय नागरिकों को कितना लाभ मिला।
बैठक में अनधिकृत फेरीवालों की समस्या, वैध हॉकिंग जोन को व्यवस्थित करने तथा 'पेडिस्ट्रियन फर्स्ट' नीति के तहत फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने पर जोर दिया गया। नगरसेवकों की सदन में उपस्थिति भी ऑडिट का हिस्सा होगी, बैठकों में उपस्थिति, पॉइंट ऑफ ऑर्डर और नोटिस ऑफ मोशन के जरिए जनहित के मुद्दे उठाने की सक्रियता का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
बीजेपी नगरसेवकों में गुटबाजी को लेकर जब बीजेपी सदन नेता गणेश खणकर से नवभारत ने बातचीत की तो उन्होंने बताया कि बीजेपी नगरसेवकों में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है। लेकिन कुछ नगरसेवक
गोल्डन स्पून के साथ पैदा होते हैं। किस विषय पर नहीं बोलना है और किस विषय पर क्या बोलना चाहिए यह उनको नहीं पता। खणकर ने कहा कि ऐसे नगरसेवकों को मीडिया में छा जाने की जल्दी रहती है।