मराठी बोर्ड पर केवल खानापूर्ति, तिवाना ने पूछा, बड़े होटलों पर कार्रवाई से क्यों बच रहा है प्रशासन?

BMC Action on Marathi Board: मराठी नामफलक विवाद पर नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने प्रशासन को घेरा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बड़े होटलों व प्रतिष्ठानों पर मराठी बोर्ड न होने पर कार्रवाई की मांग।
Marathi Signboards: Mere Tokenism—Tiwana Asks, "Why is the Administration Avoiding Action Against Large Hotels?"
मनपा मुंबई (सोर्स: फाइल फोटो)
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Marathi Signboard Controversy: मुंबई में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मराठी नामफलक को लेकर स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद हजारों दुकानों, होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अभी भी मराठी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। इस गंभीर मुद्दे को स्थायी और विधि समिति के सदस्य तथा नगरसेवक तेजिंदर सिंग तिवाना ने प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने प्रशासन की लापरवाही पर कड़ा एतराज जताते हुए मराठी को नजरअंदाज करने वालों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है।

तिवाना ने प्रशासन से सीधा सवाल किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्रवाई को अनिवार्य रूप से लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने निरीक्षकों के कामकाज पर तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या वे अपने इलाके में घूमते नहीं हैं या फिर उनके चश्मे का नंबर इतना बढ़ गया है? उन्हें केवल अंग्रेजी के बड़े बोर्ड ही दिखाई देते हैं? तिवाना ने आरोप लगाया कि प्रभावी कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस देकर खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा कि अब तक कितने प्रतिष्ठानों पर वास्तव में जुर्माना लगाया गया है या कितनों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।

बड़े प्रतिष्ठानों और होटलों की दबंगई

नगरसेवक ने इस बात पर भी गहरी नाराजगी जताई कि मुंबई के बड़े होटल और कॉर्पोरेट इमारतें, जैसे वेस्टिन और मॉर्गन स्टैनली, केवल अंग्रेजी नामफलक का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही फिल्म कलाकारों के रूफटॉप होटल्स और आलीशान रेस्टोरेंट्स में भी इन नियमों का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नियम केवल आम दुकानदारों के लिए बनाए गए हैं और बड़े लोगों को कानून से विशेष छूट दी गई है। विधि समिति अध्यक्ष के पत्र के बावजूद वेस्टिन पर हुई कार्रवाई का ब्यौरा मांगते हुए उन्होंने प्रशासन से पूछा कि क्या सिर्फ फोटो खींचकर मामला रफा-दफा कर दिया गया है।

मराठी भाषा का सम्मान कागजों तक सीमित न रहे

मराठी नामफलक के नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की वकालत करते हुए तिवाना ने कहा कि कई जगहों पर अंग्रेजी बड़े अक्षरों में और मराठी कोने में बेहद छोटे अक्षरों में लिखकर नियमों का मजाक उड़ाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या मराठी में छोटे अक्षरों में लिखना स्वीकार्य है या बड़े अक्षरों की अनिवार्यता होनी चाहिए।

तिवाना ने जोर देकर कहा कि मराठी भाषा का सम्मान केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह ठोस प्रशासनिक कार्रवाई में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए, अन्यथा ये सभी नियम केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाएंगे।

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