मुंबई-पुणे और कोंकण रूट पर विस्टाडोम सुपरहिट, 93% से ज्यादा ऑक्यूपेंसी ने तोड़े रिकॉर्ड

Vistadome Revenue: मध्य रेल के विस्टाडोम कोच ने पिछले 3 साल में ₹81 करोड़ से अधिक का राजस्व कमाया है। मुंबई-पुणे और कोंकण रूट पर 5.33 लाख यात्रियों ने कांच की छत वाले इन प्रीमियम कोचों का लुत्फ उठाया।
Vistadome a Superhit on Mumbai-Pune and Konkan Routes; Occupancy Exceeding 93% Breaks Records
विस्टाडोम कोच (सोर्स: फाइल फोटो)
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Central Railway Vistadome Coach: मुंबई से पुणे के दुर्गम घाट हों या कोंकण की हरी-भरी वादियां, पटरियों पर दौड़ते मध्य रेल के विस्टाडोम (Vistadome) कोच यात्रियों के बीच 'सुपरहिट' साबित हो रहे हैं। कांच की पारदर्शी छत, बड़ी खिड़कियों और बादलों के बीच से गुजरने का अनूठा अनुभव पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। यही कारण है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में इन प्रीमियम कोचों ने न केवल लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, बल्कि मध्य रेल के खजाने में 81.29 करोड़ रुपए का भारी राजस्व भी जमा किया है।

राजस्व और यात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि

मध्य रेल द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच कुल 11,878 विस्टाडोम फेरे संचालित किए गए, जिनमें 5.33 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया।

  • वित्तीय वर्ष 2023-24: इस दौरान 1,76,404 यात्रियों ने सफर किया, जिससे ₹26.50 करोड़ की आय हुई। औसत ऑक्यूपेंसी 91.36% रही।
  • वित्तीय वर्ष 2024-25: यात्रियों की संख्या बढ़कर 1,76,608 हुई और राजस्व ₹26.83 करोड़ तक पहुंचा। ऑक्यूपेंसी में भी सुधार होकर यह 92.56% दर्ज की गई।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26: यह साल विस्टाडोम के लिए सबसे सफल रहा, जहाँ 1,80,466 यात्रियों ने यात्रा की और ₹27.96 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। औसत ऑक्यूपेंसी बढ़कर 93.67% के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गई।

क्यों खास है विस्टाडोम का सफर?

विस्टाडोम कोच को विशेष रूप से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी पारदर्शी ग्लास रूफटॉप और विशाल खिड़कियां हैं, जो यात्रियों को पहाड़ों, घाटियों और झरनों का 360-डिग्री पैनोरमिक दृश्य प्रदान करती हैं। इसके अलावा, 180 डिग्री घूमने वाली सीटें और रियर ऑब्जर्वेशन लाउंज यात्रियों को एक आलीशान और शाही यात्रा का अहसास कराते हैं।

आधुनिक सुविधाओं का संगम

ये कोच न केवल सुंदर हैं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक से भी लैस हैं। इनमें इलेक्ट्रिक ऑटोमैटिक स्लाइडिंग डोर, एलईडी-एलसीडी डिस्प्ले, वातानुकूलित इंटीरियर, दिव्यांगों के अनुकूल चौड़े दरवाजे और आधुनिक बायो-टॉयलेट की सुविधा है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे कोच में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

वर्तमान में ये सेवाएं मुंबई-पुणे घाट, मुंबई-गोवा कोंकण मार्ग और पुणे-सिकंदराबाद जैसे दर्शनीय रेलखंडों पर उपलब्ध हैं। पिछले तीन वर्षों की सफलता यह साबित करती है कि भारतीय रेल अब केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि प्रीमियम पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बनती जा रही है।

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