LPG संकट ने दिलाई कोरोना की याद! बंद हो रहे रेस्टोरेंट, लकड़ी जलाकर खाना पका रहे मजदूर

Mumbai LPG Crisis: मुंबई में एलपीजी की भारी किल्लत से हाहाकार मचा है। कमर्शियल सिलेंडर की कालाबाजारी, होटलों की तालाबंदी और मजदूरों के पलायन ने कोरोना काल की यादें ताजा कर दी हैं।
Gas Cylinder Shortage hotels closed
गैस की कमी के कारण होटल बंद (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai Gas Cylinder Shortage: एलपीजी का गहराता संकट कोरोना महामारी के समय की याद दिलाने लगा है, तब बड़ी संख्या में लोगों का पलायन शहरों से गांव की तरफ हुआ था। मुंबई में एलपीजी क्राइसिस दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, कमर्शियल के अलावा घरेलु सिलेंडर की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। आम नागरिक खाना पकाने के लिए कोयले व केरोसिन का इस्तेमाल कर रहे हैं। दिहाड़ी मजदूरों की चुनौती भी बढ़ गई है। क्योंकि अधिकांश स्ट्रॉट फूड की दुकाने बंद हो गई है। कई मजदूरों का कहना है कि उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा है जिससे वह खाना नहीं बना पा रहे हैं। मजबूरन लकड़ी का इस्तेमाल कर आग जलाकर वह खाना बना रहे हैं। खाने की किल्लत होने से कई मजदूर गांव की ओर पलायन कर रहे हैं जिससे कई छोटे उद्योगों को नकसान हो रहा है।

रेडी-टू-कंज्यूम विकल्पों की बिक्री में 15% की बढ़ोतरी

व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी के चलते उपभोक्ताओं के खरीदारी के रुझानों में बदलाव देखने को मिल रहा है। ई-कॉमर्स और विवक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर तैयार-खाने योग्य (रेडी-टू कंज्यूम) भोजन उत्पादों की बिक्री में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। अमेजन इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, इंस्टेंट नूडल्स, स्नैक्स, पैकेज्ड भोजन और पेय पदार्थ जैसे रेडी-टू-कंज्यूम विकल्पों की बिक्री में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में कम समय में तैयार होने वाले सुविधाजनक भोजन उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि मुंबई समेत अन्य महानगरों के साथ-साथ सोनीपत और पणजी जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी देखने को मिल रही है। रेडी-टू-इंट भोजन की खपत में यह बढ़ोतरी एलपीजी आपूर्ति में आई बाधाओं के साथ जुड़ी हुई है। इसी के साथ मुंबई भर के ऑनलाइन मार्केटप्लेस और रिटेल स्टोर्स में इंडक्शन कुकटॉप की मांग भी बढ़ रही तकनीक के जरिए सीधे बर्तनों को गर्म करते हैं और एलपीजी सिलेंडर की आवश्यकता को समाप्त करते हैं

चाय-कॉफी हुआ महंगा, अब कोयला का भी दाम बढ़ा

गैस की कमी के चलते कई स्ट्रीट फूड व पेय पदार्थ जैसे चाय कॉफी के दाम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। औसतन एक कप चाय 10 रुपये की मिलती है जो अब बढ़‌कर 15 रुपये हो गई है। कई स्ट्रीट फूड जैसे वडा पाव, समोसा जो अब तक कुछ जगहों पर मिल रहे हैं। उनके दाम भी बढ़ाए गए हैं। कई चाय वाले लकड़ी जलाकर चाय बना रहे हैं। इस दौरान अचानक कोयला की डिमांड बढ़ने से उसके दाम में भी बढ़ोतरी हुई है।

अंधेरी, घाटकोपर, कुर्ला, सायन व दादर में कई होट बंद

मुंबई शहर में 50 प्रतिशत से अधिक होटल व रेस्टोरेंट बंद पड़ गए है। मालिकों का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहा है। 1800 रुपये में बिकने वाला सिलेंडर की कीमत काला बाजार में एक सिलेंडर की कीमत 5 हजार रुपये तक पहुंच गई है। मालाड, अंधेरी, घाटकोपर, कुर्ला सायन व दादर में कई रेस्टोरेंट बंद हो गए और कई रेस्टोरेंट लिमिटेड मेन्यु पर ऑपरेट कर रहे हैं। सिलेंडर की कीमत बढ़ने के चलते चाय वाले से लेकर होटल व रेस्टोरेंट सभी बंद हो गए हैं। इससे रोजाना लाखों रुपये की हानि हो रही है। कई रेस्टोरेंट में काम करने वेटर, शेफ को अनिश्चित काल के लिए काम से निकाल दिया गया है। मालिक ने बताया कि जब स्थिति बेहतर होगी तब उन्हें काम पर बुलाया जाएगा।

अक्षय कुमार बोले- पत्नी ने दिए दो इंडक्शन के ऑर्डर

अभिनेता अक्षय कुमार ने मीडिया से बातचीत के दौरान एलपीजी सिलेंडरों की कमी के बारे में अपना रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि अभी तक तो नहीं है प्रॉब्लम कोई। मेरी वाइफ ने कल ही दी इंडक्शन ऑर्डर किए है। वो घर पर पहुंचे या नहीं अब तक, वो मुझे नहीं पता। बता दे कि ईरान-इजराइल युद्ध के बीच गैस सिलेंडर की दिक्कतों से निपटने के लिए लोगों ने इंडक्शन, माइक्रोवेव ओवन और एयर फ्रायर जैसे खाना बनाने वाली मशीनों की खरीदारी शुरू कर दी है।

लाइसेंस फीस में राहत दी जाए

होटल एवं रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े संगठनों ने महाराष्ट्र सरकार से राहत की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में वार्षिक लाइसेंस शुल्क जमा करना व्यवसाथियों के लिए मुश्किल हो गया है। इसलिए सरकार को लाइसेंस फीस की अंतिम तिथि बढ़ाने या इसे किस्तों में जमा करने की अनुमति देनी चाहिए, उद्योग प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि लाइसेंस शुल्क को चार तिमाही किस्तों में जमा करने की सुविधा दी जाए और 31 मार्च की समयसीमा को आगे बढ़ाया जाए। उनका मानना है कि इससे व्यवसाथियों को आर्थिक दबाव से राहत मिल सकेगी, एलपीजी संकट के चलते कई होटलों ने अपने मेन्यू में कटौती की है और कुछ ने वैकल्पिक साधनों जैसे इलेट्रिक या कोयले का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों के लिए भोजन व्यवस्था करना भी चुनौती बनता जा रहा है।

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