Iran-Israel War: जंग के बीच LPG संकट का डर खत्म! भारत ने खोजा 'जबरदस्त' तोड़; अब घर-घर पहुंचती रहेगी रसोई गैस

LPG Crisis: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर भारत पर पहले से ही दिखने लगा है।
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कैबिनेट मंत्रियों के साथ पीएम मोदी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Middle East Tensions: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद एलपीजी संकट ने लोगों के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। हालात यह हैं कि रेस्टोरेंट से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक एलपीजी की किल्लत के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने का फैसला किया है।

ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच सरकार का कहना है कि वह हालात को सामान्य करने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है, क्योंकि मिडिल ईस्ट के तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है और एलपीजी की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ा है।

भारत ने निकाली नई तरकीब

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर भारत पर पहले से ही दिखने लगा है। उन्होंने बताया कि भारत का लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होता था, और इस मार्ग में बाधा आने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत अब अमेरिका से एलपीजी आयात कर रहा है। इसके अलावा एलएनजी की आपूर्ति ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर भी काम कर रही है, ताकि आपूर्ति को सामान्य किया जा सके।

एलपीजी की चिंताजनक स्थिति

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकारी प्रयासों के बावजूद एलपीजी को लेकर दबाव बना हुआ है। हालांकि ऑनलाइन बुकिंग की स्थिति में सुधार हुआ है और लगभग 93 प्रतिशत उपभोक्ता डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, फिर भी कई जगहों पर लोगों को गैस के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे धैर्य रखें और डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने के बजाय होम डिलीवरी का इंतजार करें।

भीषण युद्ध की ओर ईरान-इजरायल

गौरतलब है कि वैश्विक स्थिति अब काफी गंभीर हो चुकी है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त कार्रवाई के बाद संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब हमलों का केंद्र ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर आ गया है, जहां तेल और गैस उत्पादन से जुड़े संयंत्रों को निशाना बनाया जा रहा है। यह पहली बार है जब दोनों पक्षों की ओर से इस तरह सीधे तौर पर ऊर्जा क्षेत्र की अहम परिसंपत्तियों पर हमले किए गए हैं।

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