GMLR परियोजना प्रभावितों को मार्च अंत तक मिलेंगे 252 फ्लैट, कांजुरमार्ग में पुनर्वास
Goregaon-Mulund Link Road Project से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए बीएमसी मार्च के अंत तक 252 फ्लैट सौंपेगी। कांजुरमार्ग पूर्व में बनाए जा रहे इन फ्लैटों में कई आधुनिक सुविधाएं भी होंगी।
- Written By: अपूर्वा नायक
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai GMLR Project: बीएमसी के अधिकारियों ने सोमवार को जानकारी दी कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (जीएमएलआर) परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए बनाए गए 252 फ्लैट मार्च महीने के अंत तक उन्हें सौंप दिए जाएंगे।
बीएमसी ऐसे प्रभावित परिवारों के लिए कांजुरमार्ग (पूर्व) में सात इमारतों में कुल 906 फ्लैट बना रही है। प्रत्येक इमारत 23 मंजिला होगी। जीएमएलआर मुंबई के पश्चिमी उपनगर गोरेगांव को पूर्वी उपनगर मुलुंड से जोड़ेगा। इस कॉरिडोर में भूमिगत सुरंगें, पुल, ट्रैफिक इंटरचेंज और फ्लाईओवर शामिल होंगे।
प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 300 वर्ग फुट
मनपा अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में जिन लोगों का पुनर्वास किया जाएगा, उनमें से बड़ी संख्या उन क्षेत्रों में रहने वालों की है जहां से सुरंगों की खुदाई के लिए शाफ्ट तैयार किए जाएंगे।
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अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 300 वर्ग फुट होगा, जिसमें एक हॉल, एक बेडरूम और संलग्न बाथरूम होगा। आवासीय परिसर में सामुदायिक हॉल, पुस्तकालय, जिम, सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। एक अधिकारी ने बताया कि केवल उन्हीं पात्र लाभार्थियों को घर दिए जा रहे हैं, जिनके वैध मकान वर्ष 2000 या उससे पहले प्रस्तावित सड़क के मार्ग में आते थे। लाभार्थियों की सावधानीपूर्वक जांच के बाद ही उन्हें आवास आवंटित किया जा रहा है।
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बनाई जा रहीं 7 इमारतें
- अधिकारियों के अनुसार, पुनर्वास के लिए बन रही सात इमारतों में से दो का निर्माण पूरा हो चुका है और उनके पूर्णता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया जारी है। शेष पांच इमारते निर्माण के अंतिम चरण में है और अगले तीन महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। सभी पात्र लाभार्थियों को फ्लैट सौंपने के बाद बचे हुए फ्लैटों को लॉटरी प्रणाली के माध्यम से बेचा जाएगा। इसी बीच, परियोजना के तहत भूमिगत सुरंगों की खुदाई का काम जून से शुरू होने की संभावना है।
- वर्ष 2025 में बीएमसी ने जापान से दो टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) मंगाई थीं, जिन्हें फिलहाल जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में दो जुड़वां सुरंगें बनाई जाएंगी, इसलिए दो टीबीएम का उपयोग किया जाएगा। इन सुरंगों की लंबाई लगभग 6।65 किलोमीटर होगी और चे नेशनल पार्क के नीचे से गुजरेंगी। सुरंगों की गहराई 20 मीटर से 160 मीटर तक होगी। पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 14,000 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि केवल भूमिगत सुरंगों की खुदाई पर करीब 6,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
