

BMC Meeting News Navnath Ban Speech Ruckus: मुंबई महानगरपालिका की विशेष सभा में आज मानसून के दौरान हुई दुर्घटनाओं और उनके लिए जिम्मेदार प्रशासन पर चर्चा के दौरान उस समय भारी बवाल हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी के पार्षद नवनाथ बन ने विपक्षी दलों पर तीखा निजी हमला किया। मानसून और नागरिक सुविधाओं पर शुरू हुई यह बहस देखते ही देखते धार्मिक और राजनीतिक रंग ले बैठी, जिसके बाद पूरे सदन में जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ।
सभा की शुरुआत में नवनाथ बन ने पिछले कुछ वर्षों में मुंबई में हुई दुर्घटनाओं के आंकड़े पेश करते हुए महाविकास अघाड़ी को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि 2013 से 2018 के बीच मुंबई में विभिन्न दुर्घटनाओं में 987 लोगों की जान गई, जो कि किसी आतंकवादी हमले में होने वाली मौतों से भी ज्यादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय के सत्ताधारी लोग घरों से बाहर नहीं निकलते थे और केवल घर से कारोबार चलाते थे, जबकि भाजपा और महायुति के लोग जमीन पर उतरकर काम कर रहे हैं।
नवनाथ बन ने आगे कहा कि 2019 से 2022 के बीच भी लगभग 300 लोगों की मृत्यु हुई और 3945 संरचनाएं धराशायी हुईं। उन्होंने मानखुर्द में हुई एक दुर्घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तीन मंजिला अवैध निर्माण गिरने से छह लोगों की मौत हो गई, लेकिन महापालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधि वहां समय पर नहीं पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि मैंग्रोव और खाड़ी की जमीन पर राजनीतिक दबाव के कारण चार-चार मंजिला अवैध बस्तियां बनाई गई हैं, जो डेथ ट्रैप की तरह हैं।
असली विवाद तब शुरू हुआ जब नवनाथ बन ने विपक्ष द्वारा उठाए गए राम मंदिर के मुद्दे पर पलटवार किया। उन्होंने उन लोगों पर सवाल उठाए जो पहले मंदिर निर्माण की तारीख पूछते थे और खिल्ली उड़ाते थे। उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा, कांग्रेस के कहने पर जिन लोगों ने राम मंदिर के भूमि पूजन में जाने से परहेज किया, उन्हें राम मंदिर पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
इसके तुरंत बाद उन्होंने सदन में उपस्थित विपक्षी सदस्यों की ओर इशारा करते हुए कहा, आज ये भगवा टोपियां पहनकर आए हैं, लेकिन जालिदार टोपियों ने इन्हें नकार दिया, इसीलिए आज ये ऐसी भगवा टोपियां पहन रहे हैं। इन्हें प्रभु रामचंद्र का नाम लेने का कोई अधिकार नहीं है।
जैसे ही नवनाथ बन ने जालिदार टोपी वाली टिप्पणी की, पूरा सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्षी पार्षदों ने अपनी सीटों से उठकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सदन में निषेध हो और अन्य नारेबाजी होने लगी। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मेयर रितु तावड़े को बार-बार सदस्यों को शांत रहने और बैठने का निर्देश देना पड़ा। विपक्षी सदस्यों ने इसे अपमानजनक बताया, जबकि सत्तापक्ष के सदस्य अपने वक्ता के समर्थन में खड़े नजर आए।
हंगामे के बीच नवनाथ बन ने अपना भाषण जारी रखने की कोशिश की और कहा कि उन्हें बोलने का अधिकार नहीं है। हालांकि, हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही में भारी व्यवधान पड़ा और माहौल काफी गरमा गया।