BMC में दो और नगरसेवकों की सदस्यता रद्द: मेयर रितू तावड़े की घोषणा; AIMIM और NCP को बड़ा राजनीतिक झटका

Mumbai BMC News: बीएमसी में एमआईएम के रोशन शेख और NCP की बुशरा मलिक की सदस्यता रद्द। जाति प्रमाणपत्र अमान्य होने और चुनावी विवाद के बाद मेयर ने की घोषणा।
BMC Mayor Ritu Tawde announces disqualification of two more corporators from MIM and NCP (Ajit Pawar) over invalid caste certificates and poll disputes
नदीम मलिक (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Mumbai BMC Corporators Disqualified: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में दो और नगरसेवकों की सदस्यता रद्द होने के बाद महानगरपालिका की राजनीतिक तस्वीर बदलने लगी है। शुक्रवार को महापौर रितू तावड़े ने बीएमसी मुख्यालय में आयोजित विशेष बैठक के दौरान इस कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा की। सदस्यता रद्द होने वालों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के एक-एक नगरसेवक शामिल हैं।

एमआईएम के दूसरे नगरसेवक की भी सदस्यता समाप्त

बीएमसी ने वार्ड क्रमांक 138 से एमआईएम के नगरसेवक रोशन इरफान शेख की सदस्यता समाप्त कर दी है। इससे पहले गोवंडी के वार्ड क्रमांक 137 से एमआईएम के नगरसेवक शमीर रमजान पटेल की सदस्यता भी रद्द की जा चुकी है। लगातार दूसरी कार्रवाई से बीएमसी में एमआईएम को बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

बुशरा मलिक की सदस्यता भी रद्द

वहीं, कुर्ला के वार्ड क्रमांक 170 से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) की नगरसेवक बुशरा कप्तान मलिक की सदस्यता जाति प्रमाणपत्र अमान्य पाए जाने के कारण समाप्त कर दी गई है। बुशरा मलिक पूर्व नगरसेवक कप्तान मलिक की बहू हैं, जबकि पूर्व विधायक नवाब मलिक उनके चाचा हैं। इस कार्रवाई के बाद बीएमसी में एनसीपी (अजीत पवार गुट) के नगरसेवकों की संख्या घटकर केवल दो रह गई है।

वार्ड 170 में बढ़ी राजनीतिक हलचल

बुशरा मलिक के निर्वाचन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाली भाजपा की उम्मीदवार एडवोकेट रंजीता केतन दिवेकर चुनाव में दूसरे स्थान पर रही थीं। सदस्यता रद्द होने के बाद वार्ड क्रमांक 170 में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और आगे की चुनावी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

कई निर्वाचनों पर अब भी चुनौती

बीएमसी के 227 नगरसेवकों में से लगभग एक-तिहाई के निर्वाचन को विभिन्न कानूनी और चुनावी आधारों पर चुनौती दी गई है। ऐसे में आने वाले समय में और भी मामलों में फैसला आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे मुंबई महानगरपालिका की राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

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