
उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे
Mumbai News In Hindi: मुंबई बीएमसी चुनाव के लिए गुरुवार को वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव में 20 साल बाद शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे के प्रमुख राज ठाकरे एक साथ आए हैं। ऐसे में बीएमसी का यह चुनाव ‘ठाकरे ब्रांड’ के लिए बड़ी परीक्षा है।
इस चुनाव के परिणाम ठाकरे परिवार के भविष्य की सियासत को निर्धारित करेंगे। ठाकरे गुट का सीधा मुकाबला बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) से है। शिवसेना (यूबीटी) बनाम शिंदे सेना से 69 सीटें, मनसे बनाम शिंदे सेना से 18 सीटें और शिवसेना (यूबीटी) बनाम बीजेपी से 97 सीटों पर मुकाबले हो रहे हैं।
मुंबई की बात करें, तो पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में शिंदे सेना के मुकाबले शिवसेना (यूबीटी) का प्रदर्शन काफी अच्छा था। इस चुनाव प्रचार के दौरान ठाकरे बंधु मराठी मानुस और मराठी अस्मिता के मुद्दे को लेकर मतदाताओं के पास गए।
यही उनका मुख्य मुद्दा रहा। मुंबई महानगरपालिका में महापौर कौन होगा, इससे लेकर भी काफी बयानबाजी हुई। बीजेपी ने जहां सिर्फ हिंदू मराठी का मेयर बनाए जाने का दावा किया, जबकि उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता संजय राऊत ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका का मेयर एक मराठी ही होगा।
इस चुनाव में सबकी नजरें खासतौर से वरली से विधायक आदित्य ठाकरे और बांद्रा पूर्व विधानसभा के विधायक वरूण सरदेसाई पर हैं। 2024 विधानसभा चुनाव में आदित्य ठाकरे ने शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रत्याशी मिलिंद देवड़ा को मात्र 8,801 वोटों से पराजित किया था।
वरली में मनसे उम्मीदवार संदीप देशपांडे को 19,367 वोट मिले थे, लेकिन इस बार मनसे और यूबीटी एक साथ है। ऐसे में ये देखना होगा कि इस गठजोड़ में ठाकरे बंधुओं को कितना फायदा होगा, क्योंकि वरली और बांद्रा पूर्व विधानसभा में बीएमसी के 12 वार्ड आते हैं।
यदि उक्त दोनों विधानसभा से ठाकरे बंधुओं की बड़ी जीत मिलती है तो ठाकरे परिवार अपना किला बचाने में कामयाब रहेंगे, बता दें कि बांद्रा पूर्व में ठाकरे परिवार का मातोश्री घर भी है। इस वजह से अपने इलाके में यूबीटी उम्मीदवारों को जीत दिलाने की सरदेसाई के सामने बड़ी चुनौती है।
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2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के 7 अनुसार, उद्धव ठाकरे की शिवसेना को मुंबई में 10 सीटें मिली। राज ठाकरे की मनसे को एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली और उनका वोट प्रतिशत मात्र 1.6 रहा।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए भगवती प्रसाद मिश्रा की रिपोर्ट






