

Slum Free Mumbai BMC Action: मुंबई को 2030 तक झोपड़पट्टी मुक्त बनाने के लक्ष्य के बीच BMC ने 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले अनधिकृत झोपड़ों के खिलाफ 1 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की है। BMC के अनुसार 2,23,150 झोपड़ों में से 39,111 इस श्रेणी में आते हैं।
मुंबई को 2030 तक स्लम फ्री बनाने की दिशा में अब झोपड़पट्टियों के बहुमंजिला और अनधिकृत निर्माण BMC के निशाने पर हैं। महानगर में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले 39,111 झोपड़ों की पहचान की गई है, जिनके खिलाफ 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक विशेष कार्रवाई की जाएगी।
BMC के आंकड़ों के मुताबिक, 4,584 झोपड़ों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है और 611 को नोटिस जारी किए गए हैं। इस कार्रवाई ने झोपड़पट्टी पुनर्विकास, पुनर्वास और ‘धारावी पैटर्न’ जैसी मांगों को लेकर बहस तेज कर दी है।
मुंबई शहर और उपनगरों में अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ BMC ने विशेष अभियान की घोषणा की है। इसके तहत 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले झोपड़ों में किए गए अनधिकृत निर्माण और बढ़ोतरी पर कार्रवाई की जाएगी।
BMC के अनुसार, मुंबई में कुल 2,23,150 झोपड़े हैं। इनमें 39,111 झोपड़े 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले पाए गए हैं। इनमें 3,348 शहर क्षेत्र, 4,536 पश्चिमी उपनगर और 31,227 पूर्वी उपनगरों में हैं।
BMC के मुताबिक, 39,111 चिन्हित संरचनाओं में से 4,584 पर निष्कासन संबंधी कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है, जबकि 611 को नोटिस दिए गए हैं। बाकी प्रभावित संरचनाओं के निवासियों से अनधिकृत हिस्से खुद हटाने की अपील की गई है।
BMC ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में अनधिकृत निर्माण स्वयं नहीं हटाने पर संबंधित प्रशासनिक वार्डों के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई में झोपड़पट्टियों के सुनियोजित सामूहिक पुनर्विकास यानी क्लस्टर डेवलपमेंट की योजनाओं के बीच बहुमंजिला झोपड़ों की समस्या भी सामने आ रही है। कुछ झोपड़पट्टियों में एक से अधिक मंजिल वाले मकान बन चुके हैं।
स्थानीय स्तर पर कुछ निवासियों और जानकारों ने BMC कार्रवाई के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कई इलाकों में झोपड़े समय के साथ ऊंचे हुए और इसके लिए स्थानीय प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल उठने चाहिए। इन आरोपों पर BMC की ओर से संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब उपलब्ध नहीं है।
BMC की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड ने पुनर्वास के बिना कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अभियान रोकने की मांग की है। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के नगरसेवक सचिन पडवल ने सवाल उठाया कि जब ये निर्माण हो रहे थे, तब प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की।
MIM के नगरसेवक जमीर कुरैशी ने भी कहा कि अवैध निर्माण के लिए केवल मकान बनाने वालों को जिम्मेदार ठहराने के साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
रेलवे की जमीन पर बने झोपड़ों को लेकर मध्य रेलवे ने भी नियमानुसार सहयोग के संकेत दिए हैं। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला के अनुसार, ऐसी झोपड़ियों पर कार्रवाई सामान्यतः BMC करती है और BMC की ओर से तोड़क कार्रवाई का प्रस्ताव आने पर रेलवे नियमानुसार सहयोग करेगा।
अब 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली कार्रवाई में पुनर्विकास, सुरक्षा, अनधिकृत निर्माण और पुनर्वास के मुद्दों के बीच प्रशासन किस तरह आगे बढ़ता है, इस पर नजर रहेगी।