

Banganga Tank Fish Death Incident BMC Action Plan: दक्षिण मुंबई के 900 वर्ष पुराने व ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब में शनिवार को बड़ी संख्या में मछलियां मृत अवस्था में मिलने से एक बार फिर पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ गई।
स्थानीय निवासियों व पर्यावरण एक्टिविस्ट ने बीएमसी से इस समस्या का स्थायी समाधान करने की अपील की। इसके बाद सोमवार को पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, बाणगंगा इलाके के नगरसेवक सनी सानप व स्थानीय बीएमसी सहायक आयुक्त के साथ बैठक की।
बैठक में तय किया गया कि पिंडदान के लिए मुंबई बीएमसी कृत्रिम तालाब बनाएगी। इसके अलावा बाणगंगा तालाब के पानी में नियमित रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति होते रहे इसके लिए अतिरिक्त पंप लगाया जाएगा
जिससे पानी का रोटेशन होता रहा और पानी में लगातार ऑक्सीजन बनी रहें। नगरसेवक सन्नी सानप ने नवभारत को बताया कि बाणगंगा को दूषित मुक्त रखने के लिए मुख्य तीन फैसले लिए गए हैं।
इसमें कृत्रिम तालाब बनाना, अतिरिक्त पंप लगाना जिससे ऑक्सीजन मात्रा बनी रहें। इसके अलावा धर्म गुरुओं के साथ बैठक कर उन्हें पिंडदान कृत्रिम तालाब में करने का अनुरोध किया गया। तालाब के आसपास 10 कृत्रिम तालाब बनाए जाएंगे। पितृपक्ष की शेष अवधि और उसके बाद भी परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए है।
लोढ़ा ने नागरिकों से अपील की कि धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पर्यावरण अनुकूल तरीके से पिंडदान करें और किसी भी प्रकार की सामग्री तालाब में न डालें। उन्होंने कहा कि बाणगंगा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर भी है। इसकी पवित्रता, स्वच्छता और जलजीवन को सुरक्षित रखना प्रशासन के साथ नागरिकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
बता दें कि पिछले कई वर्षों से बाणगंगा में पिंडदान के अवसर पर पानी दूषित होने की वजह से मछलियों की मरने के मामले सामने आते रहें हैं। इस वर्ष बढ़ती गर्मी और तालाब के पानी में बड़ी मात्रा में पिंडदान की सामग्री, आटे के गोले, तेल तथा
अबीर-गुलाल डाले जाने के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर घटने से मछलियों की मौत होने का प्राथमिक अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी में डाले गए जैविक पदार्थों के विघटन में बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन की खपत होती है।
इससे मछलियों को सांस लेने में परेशानी होती है और वे तड़प-तड़पकर मर जाती है। इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं और इस वर्ष एक बार फिर इसकी पुनरावृत्ति हुई है।
घटना के बाद दक्षिण मुंबई के बीएमसी डी वार्ड के सहायक आयुक्त संतोष सालुंखे ने बताया कि तालाब के पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। इस मामले में भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिंडदान के कारण पानी में ऑक्सीजन की कमी होने से मछलियों के जीवन पर संकट पैदा होता है।
नगरसेवक सन्नी रविंद्र सानप ने भी कहा कि बाणगंगा को पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। धर्मगुरुओं से पिंडदान कृत्रिम तालाबों में कराने का अनुरोध किया गया है और पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पंप लगाए जाएंगे।