

मुंबई दुनिया के 122 शहरों में तीसरे सबसे प्रदूषित शहर पर पहुंची, AQI 166 दर्ज।
बीएमसी प्रशासन ने IQAir की रिपोर्ट मानने से किया इनकार।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए 76 विशेष दस्ते तैनात, हर दस्ते को रोज कम से कम दो निर्माण स्थलों का निरीक्षण करना है।
Mumbai Air Pollution IQAir Report BMC: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। एक्यूआई रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। समीर ऐप के मुताबिक गुरुवार को शहर का वायु प्रदूषण सूचकांक 100 से लेकर 130 के बीच रहा, पर अन्य ऐप के मुताबिक यह आंकड़ा 160 से लेकर 200 के बीच रहा। बीएमसी एक्यूआई को मापने के लिए केवल समीर ऐप का इस्तेमाल करने के लिए कह रही है। अन्य ऐप के एक्यूआई डेटा को प्रशासन की तरफ से खारिज किया जा रहा है।
पत्रकारों से संवाद कर बीएमसी का कहना है कि शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी गई है। बीएमसी ने पिछले कुछ वर्षों की तुलना कर यह भी बताया कि सबसे साफ दिन वर्ष 2026 में (226 दिन) अब तक दर्ज किए गए हैं। पर सवाल उठता है कि सब कुछ ठीक है तो हाई कोर्ट ने आयुक्त, पुलिस आयुक्त व एमपीसीबी के डायरेक्टर को 26 अक्टूबर को सुनवाई में मौजूद रहने समन क्यों जारी किया गया है?
मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताते हुए बीएमसी और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। अदालत ने टिप्पणी की कि समुद्री हवाओं और खुले स्थानों के बावजूद मुंबई का प्रदूषण स्तर दिल्ली से भी अधिक होना चौंकाने वाला है। अदालत ने सवाल उठाया कि जब लाखों लोग प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी चैन से कैसे सो सकते है?
मुंबई में प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी अधिक होने पर चिंता जताते हुए अदालत ने चेतावनी दी कि यदि लापरवाही जारी रही, तो संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा और उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी। 22 सितबर और 15 अक्टूबर को जारी किए गए अपने विस्तृत निर्देशों का हवाला देते हुए अदालत ने चीएमसी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आलोचना की। अदालत ने कहा कि ये दोनों निकाय बुनियादी सार्वजनिक सूचनाएं जारी करने में विफल रहे है, जिनमें स्पष्ट किया जाना चाहिए था कि सड़कों, गलियों, रास्तों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ना प्रतिबंधित है।
BMC निर्माण स्थलों पर सेंसर आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरण लगाना अनिवार्य है। 3,166 निर्माण स्थलों पर ऐसे उपकरण लगाए जा चुके हैं। उन्हें केंद्रीय डैशबोर्ड से जोड़ा गया है। प्रदूषण के स्तर पर नजर रखी जाती है। निर्धारित सीमा से
अधिक प्रदूषण पाए जाने पर संबंधित स्थल को तत्काल आवश्यक कदम उठाने होते हैं। 70 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली निर्माण परियोजनाओं के चारों ओर कम से कम 35 फीट ऊंची टिन या धातु की चादरों की घेराबंदी का प्रावधान है।
निर्माण सामग्री और मलबा ले जाने वाले वाहनों को ऊपर तथा चारों तरफ से ढंकना होगा, वाहनों के पहियों की सफाई, ओवरलोडिंग पर रोक और निर्माण स्थलों से निकलने वाले मलबे को अधिकृत स्थानों तक पहुंचाना भी अनिवार्य है। इसके लिए मुंबई डेब्रिस कंट्रोल एंड ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से मलबे की आवाजाही और अधिकृत निपटान पर नजर रखी जाती है।
निर्माण स्थलों से सटी सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी भी डेवलपर और ठेकेदारों की है। 2025 में मुंबई में 218 दिन एक्यूआई की अच्छी और संतोषजनक श्रेणी में रहे, जबकि 2024 में ऐसे 216 और 2023 में 185 दिन दर्ज किए गए थे।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। आईक्यू एयर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई दुनिया के 122 शहरों की सूची में तीसरे सबसे प्रदूषित शहर के स्थान पर पहुंच गई है। एक सप्ताह पहले मुंबई पांचवे स्थान पर थी।
शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 166 दर्ज किया गया है। मौसम में बदलाव, बढ़ता तापमान, धीमी हवाएं और हवा में नमी प्रदूषण बढ़ने के संभावित कारण माने जा रहे है। हवा की गति कम होने से प्रदूषक वातावरण में जमा हो रहे हैं।
निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं भी स्थिति को प्रभावित कर रहा है। शहर में धुंध बढ़ने से दृश्यता पर असर पड़ रहा है।
प्रदूषित हवा बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकती है। लेकिन बीएमसी प्रशासन ने अमेरिका की आईक्यू एयर की रिपोर्ट मानने से इंकार कर दिया।
मुंबई बीएमसी की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए वार्ड स्तर पर 76 विशेष दस्ते तैनात है। प्रत्येक दस्ते को प्रतिदिन कम से कम दो निर्माण स्थलों का निरीक्षण करना है।
प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों और निर्माण स्थलों पर अचानक जांच कर नियमों के पालन की स्थिति देखी जाती है। कार्रवाई के दौरान निरीक्षण रिपोर्ट, तस्वीरों और वीडियो के जरिए उल्लंघन का रिकॉर्ड भी तैयार किया जाता है।