मंत्री शेलार की घोषणा, 25 हजार से अधिक गैर ओसी इमारतें होंगी नियमित, लाखों को मिलेगी राहत

Mumbai News: मुंबई में 25 हजार से अधिक गैर-ओसी इमारतों को नियमित करने की नई नीति 2 अक्टूबर से लागू होगी। लाखों परिवारों को इससे को राहत मिलेगी।
मंत्री आशीष शेलार के साथ बैठक (pic credit; social media)
मंत्री आशीष शेलार के साथ बैठक (pic credit; social media)
Published on
Updated on

OC buildings will Regularized: महानगर में रहने वाले लाखों परिवारों को आखिरकार बड़ी राहत मिलने जा रही है। वर्षों से जिन इमारतों को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट यानी ओसी नहीं मिल सका, वे अब नियमित की जाएंगी। उपनगर के पालक मंत्री आशीष शेलार ने घोषणा की है कि राज्य सरकार 2 अक्टूबर से नई नीति लागू करेगी, जिसके तहत लगभग 25 हजार से अधिक इमारतों को ओसी प्रदान किया जाएगा।

अब तक इन इमारतों में रहने वाले लोगों को तकनीकी रूप से ‘अनधिकृत निवासी’ माना जाता था। ओसी न होने के कारण कभी भी बेघर होने का खतरा मंडराता था। यही वजह है कि यह फैसला लाखों मुंबईकरों के लिए एक ऐतिहासिक राहत साबित होगा।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में हुई बीएमसी, नगर विकास विभाग, राजस्व विभाग और सहकारिता विभाग की संयुक्त बैठक में लिया गया। नई नीति में न केवल बीएमसी के विकास नियंत्रण नियमों के तहत बनी इमारतें शामिल होंगी, बल्कि महाडा, एसआरए और अन्य प्राधिकरणों की परियोजनाएं भी कवर होंगी।

मंत्री आशीष शेलार ने स्पष्ट किया है कि यह नीति उन इमारतों के लिए है जहां निर्माण के दौरान तकनीकी या प्रशासनिक चूक, पुराने नियमों की खामियां या डेवलपर्स की गड़बड़ियों के कारण ओसी नहीं मिल पाया था। उनका कहना है कि सरकार अब ऐसे मामलों को संवेदनशीलता से हल करेगी और लोगों को सुरक्षित छत मुहैया कराएगी।

इस बीच, मुंबई भाजपा ने भी इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है। पार्टी अध्यक्ष अमित साटम ने उत्तर मुंबई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी की अगुवाई में चार सदस्यीय कमेटी गठित की है, जिसमें अनुभवी वकील शामिल हैं। यह कमेटी बिना ओसी वाली इमारतों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके।

यह मुद्दा हाल ही में तब सुर्खियों में आया जब ताड़देव की 34 मंजिला विलिंग्डन सोसायटी के 17वीं से 34वीं मंजिल तक के फ्लैट धारकों को ओसी न होने के चलते फ्लैट खाली करने की नौबत आ गई। कोर्ट के आदेश से इस पर कानूनी लड़ाई शुरू हुई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति लागू होने के बाद ऐसे हजारों परिवारों को न केवल राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में भी इस तरह की समस्याओं का स्थायी हल हो जाएगा। सरकार का यह कदम निकाय चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक फैसला भी माना जा रहा है।

मुंबई जैसे महानगर में जहां हर इंच जमीन कीमती है, वहां 25 हजार इमारतों को नियमित करने का निर्णय शहर के लिए नई राह खोलने वाला साबित हो सकता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com